(और इनकी सुनिए …) ‘‘हम किसी प्रकार की कट्टरतावादी गतिविधियों में सम्मिलित नहीं हैं !’’

देहली बमविस्फोट में तुर्किये का नाम आने पर उसका स्पष्टीकरण

अंकारा (तुर्किये) – देहली बमविस्फोट प्रकरण के आतंकवादी डॉ.  उमर तथा डॉ.  मुजम्मिल ये पूर्व में तुर्किये गए थे, यह बात उजागर होने के पश्चात् जांच की जा रही है । इस पृष्ठभूमि में तुर्किये ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि तुर्किये भारत या किसी अन्य देश को लक्ष्य करने वाली कट्टरतावादी गतिविधियों में किसी भी प्रकार से अथवा रूप में सम्मिलित नहीं है । ये दावे पूर्णतया भ्रमित करने वाले हैं तथा उनका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है ।

१. डॉ.  उमर तथा मुजम्मिल को तुर्किये जाने के लिए जैश-ए-महम्मद से सहायता प्राप्त हुई होने का संशय है । ये दोनों ‘टेलिग्राम’ एवं ‘सिग्नल’ जैसे अनुप्रयोगों का उपयोग कर रहे थे । उन्हें इन माध्यमों से निर्देश प्राप्त हुए एवं तत्पश्चात् वे तुर्किये गए ।

२. सूत्रों के अनुसार डॉ. मुजम्मिल द्वारा दी गई सूचना के अनुसार, जैश-ए-महम्मद के साथ के प्रारम्भिक काल में जिन हस्तक (हैण्डलर) से उन्होंने संवाद साधा, उसका नाम ‘अबू उकासा’ था । वर्ष २०२२ की बैठक के लिए तुर्किये यह स्थान चुना गया था, जिससे देश की सुरक्षातंत्रों को संशय न हो ।

संपादकीय भूमिका 

  • ‘‘हां, हम भारत के बमविस्फोटों में सम्मिलित हैं’’ – क्या ऐसा तुर्किये कभी कहेगा ? अतः वह पाकिस्तान के समान ही असत्य बोलेगा !
  • पाकिस्तान के पश्चात् अब तुर्किये भारत में आतंकवादी गतिविधियां करने के साथ ही पाकिस्तान को सैन्य सहायता प्रदान करने लगा है । अतः भारत ने उसके विषय में अभी ही ठोस निर्णय लेकर कार्रवाई करना आवश्यक है !