
ग्वालियर (मध्यप्रदेश) – यहां विषैली गैस से सत्येन्द्र शर्मा के २ बच्चों की मृत्यु हो गई, जबकि शर्मा और उनकी पत्नी को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया है तथा उनकी स्थिति चिंताजनक है । शर्मा जिस घर में रहते थे, उस घर के मालिक ने एक कमरे में २५ क्विंटल गेहूं जमा किया था । उसमें कीडे न लगें, इसके लिए बोरियों में सल्फास कीटनाशक औषधि रखी गई थी । यह औषधि पानी के संपर्क में आने से फॉस्फीन गैस बनने लगी । कूलर के कारण यह विषैली गैस पूरे कमरे में फैल गई । इससे मध्यरात्रि के समय पूरा शर्मा परिवार सांस लेने में तकलीफ महसूस करने लगा । सबको उल्टी होने लगी । इसमें उनके छोटे बेटे और बेटी की मृत्यु हो गई । इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने अस्पताल के बाहर आकर सडक जाम कर दी । घर के मालिक के विरुद्ध हत्या का अपराध प्रविष्ट करने की मांग की गई । पीडित परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग भी की जा रही है ।
‘क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट’ डॉ. मनीष गुप्ता ने सल्फास (एल्यूमिनियम फॉस्फाइड) से होने वाले खतरों के बारे में बताया । फॉस्फीन गैस रंगहीन होती है । सडी हुई मछली या लहसुन जैसी इसकी गंध होती है । इस गैस का प्रभाव श्वसन क्षमता पर तथा हृदय पर होता है । इससे एक साथ कई अंग निष्क्रिय हो जाते हैं । सल्फास से होने वाले विष के उपचार केवल अस्पताल में ही संभव हैं । इस गैस की अल्प मात्रा भी जानलेवा सिद्ध हो सकती है ।
संपादकीय भूमिकाइस प्रकार के कीटनाशक के दुष्प्रभाव जानकर उसके संदर्भ में सावधानी बरतना और उपाय निकालना आवश्यक है, यही इस घटना से समझ में आता है । |
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