Operation Sindoor Col Sofiya Qureshi : ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारत के बहुक्षेत्रीय अचूक युद्ध का प्रमाण ! – कर्नल सोफिया

कर्नल सोफिया कुरैशी

नई देहली – भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी ने कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ देश की युद्धनीति में एक बडा परिवर्तन ले आया । यह अभियान भारत के बहुक्षेत्रीय अचूक युद्ध का प्रमाण बन गया है । इस काल में पाकिस्तान ने सूचनायुद्ध भी किया; इसलिए युवकों को स्वयं की ‘डिजिटल’ साक्षरता बढाना तथा झूठे समाचारों से सतर्क रहना आवश्यक है । यहां के माणेकशॉ सेंटर में आयोजित ‘चाणक्य डिफेंस डायलॉग : यंग लीडर्स फोरम’में कर्नल कुरैशी ‘भारत की युद्धनीति में युवकों की भूमिका’, इस विषय पर बोल रही थीं ।
२२ अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी आक्रमण का प्रतिशोध लेने हेतु ७ मई २०१५ को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभियान के एक भाग के रूप में भारत ने पाकिस्तान तथा पाक अधिकृत कश्मीर में बने आतंकियों के ९ अड्डे ध्वस्त किए ।

कर्नल कुरैशी ने उपस्थित युवकों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि,

१. सेनाप्रमुख के नेतृत्व में सेना अब युवकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं ‘साइबर टेक्नॉलॉजी’ जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दे रही है । इसके लिए ‘आईआईटी’ (इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी – भारतीय तकनीकी संस्था), ‘रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्था (डी.आर् डी.ओ.- ‘डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन)’ तथा अन्य संस्थाओं के सहयोग से काम किया जा रहा है ।

२. आप भारत की युवा शक्ति हैं । केवल गोलीबारी में ही नहीं, आप ‘फायरवॉल’में भी प्रशिक्षित हैं । वर्तमान में युद्ध केवल बंकरों में अथवा गोलियों से नहीं होते, अपितु ‘बाईट्स’ (छोटी भेंटवार्ताएं / प्रतिक्रिया) एवं ‘बैंडविड्थ’ से (सूचना वहन क्षमता से) लडे जाते हैं ।

३. भारत की कुल जनसंख्या में से ६५ प्रतिशत लोग ३५ वर्ष से भी अल्प आयु के हैं तथा ये लोग देश की नीतिजन्य आरक्षण का प्रतिनिधित्व करते हैं । युवकों की ऊर्जा, नवोन्मेष एवं उत्तरदायित्व देश की सुरक्षा तथा विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं । पूरे विश्व में लगभग ५३ संघर्ष चल रहे हैं, जिसमें इजरायल-हमास संघर्ष एवं रूस -युक्रेन युद्ध का समावेश है । युवा लोग इस संघर्ष को तकनीक के माध्यम से अर्थात ‘ड्रोन’का उपयोग, साईबर, इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना युद्ध के द्वारा लड रहे हैं ।

४. भारत का भविष्य आपके हाथों में है । चाहे आप सैनिक हों, शिक्षक हों, ‘कोडर’ (संगणकीय तकनीक विकसित करनेवाला व्यक्ति) हों अथवा ‘डिजाइनर’ हों, कठोर परिश्रम का फल आपको मिलता है ।