न्यायालय में बढा पारा : झारखंड उच्च न्यायालय में अधिवक्ता एवं न्यायमूर्ति में तीव्र विवाद !

रांची (झारखंड) – यहां झारखंड उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के तर्क पर न्यायमूर्ति द्वारा टिप्पणी करने के पश्चात् अधिवक्ता एवं न्यायमूर्ति के मध्य विवाद उत्पन्न हो गया । ‘मैं अपने प्रकार से तर्क कर सकता हूं । किसी भी अधिवक्ता का अपमान करने का प्रयास न करें । देश के न्यायालयों में वातावरण रोषपूर्ण है । मर्यादा मत छोडिए । मैं ४० वर्षों से वकालत कर रहा हूं’, ऐसे शब्दों में झारखंड उच्च न्यायालय में एक अधिवक्ता ने न्यायमूर्ति को सुनाया । १६ अक्तूबर को घटी इस घटना का वीडियो सामाजिक माध्यमों में बडे स्तर पर प्रसारित हुआ है ।

१. न्यायमूर्ति राजेश कुमार १६ अक्तूबर को बिजली आपूर्ति पूर्ववत् करने के सन्दर्भ में प्रकरण पर सुनवाई कर रहे थे । बिजली वितरण विभाग द्वारा अधिवक्ता के मुवक्किल के घर में बिजली आपूर्ति खण्डित किए जाने से होनेवाले कष्ट के विषय में बताया । उस पर न्यायमूर्ति राजेश कुमार द्वारा दिया गया निर्णय अधिवक्ताओं ने मान्य कर लिया ।

उस के पश्चात् दूसरे प्रकरण की सुनवाई आरम्भ हुई । उस समय अधिवक्ता महेश तिवारी के तर्क करने के प्रकार पर न्यायमूर्ति ने टिप्पणी करने के पश्चात् विवाद आरम्भ हो गया । इस समय अधिवक्ता तिवारी ने उपरोक्त वक्तव्य किए ।

२. अधिवक्ता तिवारी के विरुद्ध न्यायालय के अपमान के प्रकरण में कार्रवाई आरम्भ की गई है । १७ अक्तूबर को झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान सहित ५ न्यायमूर्ति की खण्डपीठ के समक्ष सुनवाई हुई । अधिवक्ता तिवारी को ३ सप्ताह में अपना पक्ष रखने का आदेश दिया गया है । इस प्रकरण की अगली सुनवाई ११ नवम्बर को होनेवाली है ।

संपादकीय भूमिका

४० वर्षों से वकालत करनेवाले अधिवक्ता ने न्यायमूर्ति को सुनाया। : ‘मेरी मर्यादा नहीं छोडी, किसी भी अधिवक्ता का अपमान करने का प्रयास न करें ।’