कॉ. गोविंद पानसरे प्रकरण

कोल्हापुर, ८ अक्टूबर – “वर्ष २००४ में कोल्हापुर में हुए यज्ञ के कार्यक्रम के लिए करवीर पीठ के शंकराचार्य तथा अन्य संस्थाओं ने २ करोड रूपये एकत्र किए, यह मैंने समाचारपत्र में प्रकाशित समाचार के आधार पर कहा” — ऐसा कथन भारतीय साम्यवादी दल के जिलाध्यक्ष के रूप में कार्य कर चुके शशिकांत पाटील ने किया । कोल्हापुर के जिला न्यायालय में अधिवक्ता संग्राम कोल्हाटकर ने शशिकांत पाटील की प्रति परीक्षा ली । प्रतिपरीक्षा में पाटील ने अनेक प्रश्नों के उत्तर “मुझे पता नहीं” तथा “मुझे स्मरण नहीं” ऐसे दिए । कॉ. गोविंद पानसरे हत्या प्रकरण की सुनवाई जिला तथा सत्र न्यायाधीश एस्.एस्. तांबे के समक्ष चल रही है ।
इस अवसर पर बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता समीर पटवर्धन, अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर तथा अधिवक्ता प्रीति पाटील उपस्थित थे, वहीं शासन पक्ष की ओर से अधिवक्ता शिवाजीराव राणे उपस्थित थे । इस प्रकरण की आगामी सुनवाई १७ अक्टूबर को होने वाली है ।
अधिवक्ता संग्राम कोल्हाटकर ने प्रति परीक्षा में कहा कि “शशिकांत पाटील को वर्ष २००४ से २००८ की कालावधि में दल से संबंधित तथा कॉ. पानसरे से संबंधित घटनाएं स्पष्ट रूप से स्मरण हैं, किन्तु साक्ष्य से संबंधित अनेक घटनाओं को वे जानबूझकर टाल रहे हैं” — यह न्यायालय के ध्यानार्थ लाया गया । “भूतपूर्व पुलिस अधिकारी एम्.एम्. मुश्रीफ द्वारा लिखित ‘हू किल्ड करकरे’ इस ग्रंथ में उल्लिखित लेख उन्होंने किस आधार पर लिया है, इस विषय में उन्होंने कभी भी मुश्रीफ, कॉ. पानसरे अथवा भूतपूर्व न्यायमूर्ति कोळसे-पाटील से नहीं पूछा । साथ ही यदि इस विषय में प्रमाण हैं, तो वे न्यायालय में क्यों नहीं गए अथवा शासन से न्याय क्यों नहीं मांगा ?” — यह भी शशिकांत पाटील ने प्रतिपरीक्षा में कहा ।
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