विश्व का पहला विश्वविद्यालय तक्षशिला भारत की ही देन !

वाराणसी (उत्तर प्रदेश) – उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां कहा कि संस्कृत दिव्य ज्ञान की भाषा है । भविष्य में संस्कृत ही विश्व को जोडने वाली भाषा बनेगी । संस्कृत से न केवल एक-दूसरे की संस्कृतियों से निकटता स्थापित होगी, अपितु विश्व कल्याण का मार्ग भी मिलेगा । वे वाराणसी में ‘अन्नपूर्णा ट्रस्ट’ द्वारा आयोजित सिलाई, कढाई एवं कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र के 14वें समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे । इस समय मुख्यमंत्री के हाथों २५० बच्चों एवं बच्चियों को सिलाई मशीन तथा लैपटॉप वितरित किए गए । मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि विश्व का पहला विश्वविद्यालय तक्षशिला भारत की ही देन है । इस विश्वविद्यालय से पाणिनि जैसे विद्वान निकले । महर्षि वाल्मीकि ने विश्व का पहला संस्कृत महाकाव्य रचा ।
संस्कृत का प्रसार हो, इसके लिए सरकार छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) सहित उच्चस्तरीय अनुसंधान (रिसर्च) के लिए भी लगातार प्रयास कर रही है । (राज्यकर्ताओं से अपेक्षा है कि वे विद्यालय के पाठ्यक्रम में संस्कृत भाषा को समाहित करने तथा उसे पढाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षक उपलब्ध कराने का प्रयास करें ! – संपादक) सरकार, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं कौशल अभियान के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है तथा उनके जीवन को सुगम बनाने के लिए प्रयत्नशील है ।
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