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बेंगलुरु (कर्नाटक) – मैसूर दशहरा महोत्सव के उद्घाटन के लिये ‘बुक्कर’ पुरस्कार विजेता तथा हिन्दूद्वेषी लेखिका बानू मुश्ताक को आमंत्रित करने के राज्य सरकार के निर्णय के विरोध में की गई याचिका सर्वोच्च न्यायालय के निरस्त करने के बाद कांग्रेस के मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट की है । उन्होंने कहा है, ‘इस निर्णय का मैं स्वागत करता हूं । मैसूर दशहरा, यह केवल धार्मिक पर्व नहीं है । जाति -धर्म से ऊपर उठकर सभी लोग यह पर्व सामूहिक रूप से मनाते हैं, ऐसा हम पहले से ही कहते आ रहे हैं । फिर भी कुछ लोगों ने इसके विरोध में अनुचित प्रचार कर समाज को विभाजित करने का प्रयास किया । अब सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के कारण हमारी सरकार का पक्ष उचित सिद्ध हुआ है, ऐसा मुझे लगता है । जाति -धर्मों में वैर फैलानेवाले विध्वंसक विचारों को अब मां चामुंडेश्वरी अच्छी बुद्धि दें, ऐसी आशा करता हूँ ।’

सामाजिक माध्यमों पर लोगों द्वारा व्यक्त की गई रोषपूर्ण प्रतिक्रियाएं –
१. एक व्यक्ति ने लिखा है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत करना पर्याप्त नहीं है । अब आप किसी मुसलमान अथवा क्रिश्चन पर्व का उद्घाटन हिन्दुओं को देकर अपनी धर्मनिरपेक्षता सिद्ध करें, तब हम आपके ये पाठ मानेंगे ।
२. दूसरे ने लिखा कि, आप कुछ भी कहें, फिर भी मैसूर दशहरा तो हिन्दू पंचांग के अनुसार ही मनाया जाता है । विजयादशमी का दिन श्री चामुंडीदेवी की विजय के रूप में मनाया जाता है ।
३. एक व्यक्ति ने कहा है कि, देश के इतिहास के सबसे बुरे मुख्यमंत्रियों में से एक । अपने पारंपरिक पर्व का उद्घाटन दूसरे धर्म के व्यक्ति से होना, यह स्वीकार करना कठिन है ।
४. मैसूर क्षेत्र में कुल आठ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र (मतदारसंघ) हैं (मडिकेरी, विराजपेट, पेरियापटना, हुणसुर, चामुंडेश्वरी, कृष्णराज, चामराज और नरसिंह) उनमें से कांग्रेस ने पांच सीटें जीती हैं । यहां के हिन्दुओं ने निःशुल्क योजनाओं को मत दिया, यही उचित दण्ड है, ऐसा एक ने कहा है ।
५. यदि आपके पक्ष में निर्णय आया, तो ‘न्यायव्यवस्था उचित है’ और यदि विरोध में निर्णय आया, तो ‘न्यायव्यवस्था मोदी के नियंत्रण में है’, ऐसा आप चिल्लाते रहते हैं ।
संपादकीय भूमिकामुसलमानों की चापलूसी और हिन्दुओं के साथ हमेशा भेदभाव करनेवाली कांग्रेस सही अर्थ में जाति -धर्मों में बैर फैला रही है । ऐसी कांग्रेस अब सुधार की सीमा से बाहर हो चुकी है, इसलिए उसका राजनीतिक अस्तित्व समाप्त करना, इसी में समाज का हित है । |
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