महाराष्ट्र राज्य सरकार के निर्देश

मुंबई – राज्य में बांग्लादेशी एवं रोहिंग्याओं की बढती घुसपैठ को ध्यान में लेकर राज्य सरकार ने फर्जी अथवा बिना किसी आदेश के लिए गए जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र को निरस्त करने के निर्देश दिए हैं । सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस विषय में सरकार के इस निर्णय की प्रति जारी की गई है ।
अनेक बांग्लादेशी नागरिक फर्जी कागदपत्रों के आधार पर देश में रह रहे हैं । उनके पास फर्जी आधारकार्ड, राशनकार्ड, भारतीय पारपत्र, बैंक खाते, पैनकार्ड, विवाह एवं अधिवास प्रमाणपत्र जैसे अनेक प्रमाणपत्र होते हैं । ये घुसपैठी गैरकानूनी पद्धति से ये प्रमाणपत्र प्राप्त करते हैं तथा वर्षाें तक अवैधरूप से राज्य में रहते हैं ।
क्या है राज्य सरकार का निर्णय ?केंद्र सरकार ने ‘जन्म-मृत्यु अधिनियम १९६९’ में संशोधन कर विलंब से पंजीकृत होनेवाले जन्म-मृत्यु के पंजीकरण का आदेश देने के अधिकार तहसीलदार, तहसील दंडाधिकारी, उपमंडल दंडाधिकारी तथा जिला दंडाधिकारी को प्रदान किए हैं, साथ ही ‘जन्म-मृत्यु’ अधिनियम पंजीकरण १९६९’ तथा ‘महाराष्ट्र जन्म-मृत्यु पंजीकरण नियम २०००’ के अनुसार पंजीकरण की कार्यपद्धति सुनिश्चित की गई है । राज्य के तहसीलदार अथवा तहसील दंडाधिकारी से निचले स्तर के अधिकारी द्वारा जारी की गई तथा जन्म के एक वर्ष उपरांत जारी किए गए जन्म-मृत्यु के पंजीकरण को निरस्त करने का सरकार ने निर्णय लिया है । १२ मार्च २०२५ को जारी सरकार के निर्णय के अनुसार लंबित जन्म-मृत्यु के पंजीकरण की विस्तृत कार्यपद्धति सुनिश्चित की गई थी; परंतु इस कार्यपद्धति के कार्यान्वयन से पूर्व तहसीलदार अथवा तहसील दंडाधिकारी से निचले श्रेणी के अधिकारियों ने अधिकार कक्षा से बाहर जाकर लंबित प्रविष्टियां लेने के आदेश जारी किए, अतः इस प्रकार से जारी किए गए फर्जी प्रमाणपत्र निरस्त किए जाएंगे । |
ऐसे होगी कार्रवाई !
१. निबंधक तहसीलदार को एक वर्ष से अधिक अवधि की जन्म-मृत्यु की प्रविष्टियां लेने के आदेशों पर आधारित सभी प्रविष्टियों की विस्तृत सूची तुरंत उपलब्ध कराए ।
२. तहसीलदार उनके कार्यालयीन अभिलेख अथवा संबंधित निबंधक से प्राप्त निर्देश से निचली श्रेणी के अधिकारियों द्वारा दिए गए आदेश के आधार पर ली गई लंबित प्रविष्टियों की पडताल कर उन आदेशों को निरस्त करें ।
३. उसका विवरण निबंधक, जिला निबंधक तथा स्थानीय पुलिस को दिया जाए । निरस्त किए गए आदेश की प्रति आवेद के पते पर भेजी जाए, जिसमें मूल प्रमाणपत्र को ७ दिन में तहसील कार्यालय में जमा करने के आदेश दिए जाएं ।
४. निर्धारित समयसीमा में प्रमाणपत्र जमा नहीं किया गया, तो पुलिस के द्वारा प्रमाणपत्र जब्त किया जाएगा । संबंधित निबंधक एवं जिला निबंधक निरस्त आदेशों के अनुसार प्रविष्टि बही में की गई प्रविष्टियों को तथा सी.आर्.एस्. पोर्टल पर की गई प्रविष्टियां निरस्त करें ।
५. इस आदेश की प्रतियों के आधार पर स्थानीय पुलिस थाने के प्रमुखों के साथ संबंधित व्यक्ति की खोज कर मूल प्रमाणपत्र जब्त किया जाए तथा वह प्रति तहसीलदार को दी जाए ।
६. इन प्रमाणपत्रों को जिलाधिकारी अथवा उपजिलाधिकारी के द्वारा निरस्त किया जाए तथा तहसीलदार प्रमाणपत्रों को निरस्त किए जाने की आश्वस्तता करें ।
७. यह पूरी प्रक्रिया अगले ३ महिनों में पूरी की जाए तथा किसी उचित कारण के बिना इसकी समयसीमा बढाई नहीं जाएगी, यह भी इसमें स्पष्ट किया गया है ।
संपादकीय भूमिकाबांग्लादेशी एवं रोहिंग्याओं की घुसपैठ पर लगाम लगाने हेतु बनाई गई नियमावली का कठोरता से तथा कार्यक्षमता से कार्यान्वयन हो, यही अपेक्षा ! |
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(और इनकी सुनिए…) “हिन्दी तथा उर्दू भारत की भाषाएं हैं, जबकि संस्कृत बाहर से आई है ।” – Congress MP Mohammad Javed