भारत की संयुक्त राष्ट्र में मांग

न्यूयॉर्क (अमेरिका) – भारत ने संयुक्त राष्ट्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि अफगानिस्तान की भूमि का उपयोग लष्कर-ए-तोयबा तथा जैश-ए-मोहमद जैसी आतंकवादी संघटनाओं द्वारा नहीं किया जाना चाहिए । इन संघटनाओं को अफगानिस्तान में कार्य करने की अनुमति न दी जाए, ऐसी दृढ मांग भारत ने सुरक्षा परिषद के समक्ष रखी ।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने सुरक्षा परिषद के समक्ष कहा कि भारत अफगानिस्तान की सुरक्षा स्थिति पर निकट से ध्यान दे रहा है । उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक समुदाय को एकत्र होकर आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष करना अत्यावश्यक है ।
अफगानिस्तान में सक्रिय आतंकवादी संघटनाएं
संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिनिधि रोजा ओटुनबायेवा ने भी स्वीकार किया कि अफगानिस्तान में आतंकवादी संघटनाओं की उपस्थिति एक गंभीर समस्या है । यद्यपि हिंसा कुछ हद तक अल्प हुई है, परंतु वर्ष २०२१ में तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर नियंत्रण प्राप्त करने के उपरांत भी संयुक्त राष्ट्र अथवा अधिकांश देशों ने तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दी है ।
पी. हरीश ने कहा कि केवल कठोर उपायों पर बल देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, अपितु सकारात्मक आचरण को प्रोत्साहित करनेवाले कदम भी उठाने आवश्यक हैं ।
संपादकीय भूमिकाअफगानिस्तान में तालिबानी आतंकवादियों की सत्ता रहते वहां आतंकवादियों को आश्रय नहीं मिलेगा, तो और कहां मिलेगा ? |
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