Online Gaming : ‘ऑनलाइन मनी गेमिंग’ के नियमन के विधेयक को केंद्रीय मंत्रीमंडल की स्वीकृति !

  • ‘ऑनलाइन गेम नियामक प्राधिकरण’ की होगी स्थापना !

  • ‘ऑनलाइन मनी गेमिंग’ पर प्रतिबंध, जबकि ‘ऑनलाइन सोशल गेम्स’ को प्रोत्साहन !

  • ‘सुराज्य अभियान’ ने विभिन्न राज्यों के मुख्य मंत्रियों से की थी मांग !

नई दिल्ली – ऑनलाइन गेमिंग को विनियमित करने वाले एक विधेयक को केंद्रीय मंत्रीमंडल ने अनुमोदन प्रदान किया । इस विधेयक का उद्देश्य ऑनलाइन गेमिंग मंचों को वैधानिक चौखटे में लाना और ‘डिजिटल अनुप्रयोगों’ के माध्यम से जुआ खेलने पर दंड की व्यवस्था करना है । प्रस्तावित विधेयक में छल एवं राज्यों के कानूनों में असंगति के विषय में चिंता व्यक्त की गई है तथा दंड एवं शिक्षा की व्यवस्था की गई है । इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को ऑनलाइन गेमिंग के लिए केंद्रीय नियामक नियुक्त किया जा सकता है । इस विधेयक का उद्देश्य ऑनलाइन सट्टेबाजी पर भी अंकुश लगाना बताया गया है । भारतीय न्याय संहिता के अनुसार अवैध सट्टेबाजी के लिए पहले से ही दंड एवं ७ वर्ष का कारावास निर्धारित है । हिन्दू जनजागृति समिति की पहल ‘सुराज्य अभियान’ ने इस विषय में केंद्र तथा राज्य सरकारों को निवेदन देकर ऐसे कानून की मांग की थी । सुराज्य अभियान की ओर से विभिन्न राज्यों के मुख्य मंत्रियों को इसी माह निवेदन भी दिए गए हैं ।

३ वर्ष का कारावास तथा १ करोड रूपयों तक दंड !

विधेयक ‘ई-स्पोर्ट्स’ तथा ‘ऑनलाइन सोशल गेम्स’ को प्रोत्साहन देने का आह्वान करता है । ‘ई-स्पोर्ट्स’ को औपचारिक मान्यता मिलने पर भारत वैश्विक स्पर्धात्मक गेमिंग क्षेत्र में सम्मिलित हो सकता है । इससे नवनिर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा, ‘स्टार्ट-अप्स’ के लिए अवसर उत्पन्न होंगे एवं राष्ट्र को खेल विकास के माध्यम से वैश्विक महासत्ता बनने में सहायता मिलेगी ।

जानिए शिक्षा की क्या है व्यवस्था !

विधेयक में व्यवस्था है कि –

१. सेवा प्रदान करना : नियमों का उल्लंघन करके ऑनलाइन मनी गेमिंग सेवा प्रदान करने वाले किसी भी व्यक्ति को ३ वर्ष तक का कारावास अथवा १ करोड रूपयों का दंड अथवा दोनों

२. विज्ञापन करना : नियमों का उल्लंघन करके विज्ञापन करने वालों को २ वर्ष तक का कारावास अथवा ५० लाख रूपयों का दंड अथवा दोनों

३. लेन-देन में सम्मिलित होना : किसी भी प्रकार के लेन-देन में सम्मिलित होने वालों को भी ३ वर्ष तक का कारावास अथवा १ करोड रूपयों का दंड हो सकता है

४. बार-बार अपराध करना : बार-बार अपराध करने वालों को ३ से ५ वर्ष का कठोर कारावास एवं दंड से सुधार हो सकता है ।

‘ऑनलाइन गेमिंग’ के लिए बैंक निधि प्रदान नहीं करेंगे !

पीड़ितों पर अन्याय न हो, इस हेतु विधेयक धन से सम्बन्धित ऑनलाइन गेम खेलने वाले व्यक्तियों को अपराधी नहीं मानता । उन्हें अपराधियों के स्थान पर पीड़ित माना गया है । यह विधेयक प्रचारक एवं आयोजक पर नियंत्रण रखता है । बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों को ऐसे खेलों से सम्बन्धित निधि प्रदान करने की प्रक्रिया पर प्रतिबंध लगाया गया है ।

विधेयक का उद्देश्य क्या ?

भारत में गेमिंग क्षेत्र का तीव्र विकास हुआ है, तथापि नियामक वातावरण अभी तक अस्पष्ट है । ‘ऑनलाइन गेम्स’ की व्यसनाधीनता, विशेषतः आर्थिक प्रलोभन, मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव के विषय में चिंता बढ़ी है । धन से सम्बन्धित ऑनलाइन गेम के कारण व्यक्तियों को आर्थिक हानि सहन करनी पड़ी है । परिणामस्वरूप अवसाद एवं आत्महत्या जैसी घटनाएं हुई हैं । ऑनलाइन मनी गेमिंग का उपयोग काले धन को श्वेत करने तथा अन्य अवैध कृत्यों के लिए भी किया जा रहा है । यह विधेयक एक ओर ‘ई-स्पोर्ट्स’ और ‘ऑनलाइन सोशल गेम्स’ जैसे ‘कैंडी क्रश’ को प्रोत्साहित करने का प्रयास करता है, तो दूसरी ओर ऑनलाइन मनी गेमिंग को स्पष्ट रूप से निषिद्ध करता है । यह विधेयक देखरेख एवं दायित्व हेतु वैधानिक नियामक प्राधिकरण की स्थापना का प्रस्ताव रखता है । ऑनलाइन गेमिंग मंच के लिए पंजीकरण एवं अनुपालन व्यवस्था भी इसमें है । नियामक प्राधिकरण को उचित परीक्षण के उपरांत यह निर्धारित करने का अधिकार होगा कि कोई खेल ‘मनी गेम’ है या नहीं ।

‘ड्रीम-११’ जैसे ऍप्स पर भी रोक होगी क्या ?

इस विधेयक के पश्चात् जनसामान्य का प्रश्न है कि ‘ड्रीम-११’ जैसे ऍप्स भी समाप्त होंगे क्या ? क्योंकि इसमें धन लगाकर खेलना होता है । विधेयक की व्यवस्थाओं के अनुसार ऐसे सभी ऍप्स पर कार्रवार्ई होने की संभावना है । क्रिकेट सहित अनेक खेलों के लिए ऐसे ऍप्स हैं, जिनमें धन लगाकर दल बनाना होता है । विधेयक के अनुसार किसी भी प्रकार का लेन-देन रखने वाले ऍप्स बंद होंगे । साथ ही सट्टेबाजी को प्रोत्साहित करने वाले ऍप्स पर नियंत्रण रखा जाएगा ।