पाकिस्तान जैसा शत्रु देश भारत को परमाणु विस्फोट की धमकी दे रहा है । वास्तव में भी यदि ऐसा हुआ, तो सामान्य नागरिक अपने स्तर पर स्वयं की रक्षा कैसे कर सकता है, इससे संबंधित सूत्र यहां दे रहे हैं ।

स्वयं के लिए आवश्यक सुरक्षा किट !
१. डिब्बाबंद अन्न (जिसमें धातु से होनेवाला विकिरण अल्प हो)
२. टॉर्च
३. तैयार उष्णतामान (इंडक्शन) स्टोव
४. प्राथमिक चिकित्सा किट
५. आवश्यक नकद पैसे
६. माचिस एवं मोमबत्तियां
७. ‘रेडिएशन’ विरोधी काली फिल्म से (एक प्रकार के आवरण) से ढकी हुई पानी की बोतल
८. आवश्यक कपडे
९. पढने के लिए पुस्तकें
१०. रेडियो सेट

बमविस्फोट होने पर क्या करना चाहिए ?
१. जिस आश्रयस्थल में खिडकियां नहीं होतीं, वहां अथवा तहखाने में जाने का प्रयास करें ।
२. कभी की वातानुकूलन यंत्र (ए.सी.) का उपयोग न करें, उससे मृत्यु होने की संभावना होती है । पंखा अथवा कूलर का उपयोग कर सकते हैं; क्योंकि वे बाहर से हवा नहीं खींचते ।
३. अन्य बिजली के उपकरणों का उपयोग न करें ।
४. खुले स्थान पर विस्फोट होने पर, वहीं लेट जाएं तथा कपडा अथवा मुखपट्टिका से मुंह एवं नाक ढंक लें । यथासंभव पूरा शरीर ढंकने का प्रयास करें ।
५. कभी भी विस्फोट की ओर न देखें; क्योंकि उसके विकिरण से आप दृष्टिहीन हो सकते हैं ।

६. घर के बाहर विकिरण के संपर्क में आने पर घर पहुंचने पर कपडों का बाहरी स्तर (लेयर) निकालें । उसे प्लास्टिक की थैली में डालकर मजबूत गांठ लगाएं । इसके कारण विकिरण का परिणाम ९० प्रतिशत तक अल्प हो सकता है । यदि पशुओं ने इस थैली को चबाया, तो उससे विकिरण बाहर निकल सकता है; इसलिए उस थैली को जहां मनुष्य एवं पशु नहीं होते, ऐसे सुरक्षित स्थान पर रखें ।
७. प्रचुर मात्रा में साबुन का उपयोग कर शीघ्र स्नान करें; परंतु साबुन को शरीर पर न घिसें । बाल केवल शैंपू से धोएं । कभी भी कंडिशनर का उपयोग न करें; क्योंकि उस पर विकिरण के कण जम सकते हैं ।
८. नाक धीरे से साफ करें ।
९. पलकें स्वच्छ करें ।
१०. परमाणु विस्फोट के समय चल-दूरभाष का उपयोग करना संकटकारी (खतरनाक) सिद्ध हो सकता है; क्योंकि विस्फोट के कारण उत्पन्न होनेवाली ‘इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स’ के कारण हानि होने की संभावना होती है । ‘इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स’ चल-दूरभाष की सर्किटरी में अवरोध उत्पन्न कर सकती हैं अथवा हानि पहुंचा सकती है, जिससे वह निरुपयोगी हो सकता है अथवा विस्फोट के कारण यदि वह खराब हो जाए, तो वह संभवतः हानिकारक सिद्ध हो सकता है । इसके अतिरिक्त विस्फोट होने के उपरांत स्वयं के लिए तथा उसके उपरांत के विनाश के कारण मानव स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के लिए बडा संकट उत्पन्न होता है ।
विकिरण से स्वयं की रक्षा कैसे करें ?
१. विस्फोटस्थल से लगभग २४ घंटे घर में रहें, तहखाने में बैठे रहें तथा कभी भी अधिक ऊंचाईवाली मंजिलों पर न जाएं ।
२. भारी कांक्रीट की दीवार, ईंट अथवा मिट्टी के ढेर के पीछे छिपकर स्वयं की रक्षा करें । ये सभी विकिरण घटा सकते हैं । चल-दूरभाष टॉवर से होनेवाला विकिरण रोकने हेतु घर की खिडकियों पर विकिरणरोधी फिल्म लगाई जा सकती है । उसे खिडकियों पर लगाएं ।
३. विस्फोट के पहले २ मिनट सबसे अधिक संकट भरे होते हैं । लगभग पहले २४ घंटे महत्त्वपूर्ण होते हैं । सामाचार वाहिनियों एवं आकाशवाणी पर सेना के अधिकारी अथवा अन्य अधिकारी जो जानकारी देते हैं, उसे ध्यानपूर्वक सुनें । सामान्य रूप से २ सप्ताह पश्चात केवल १ प्रतिशत विकिरण शेष रहता है ।
– डॉ. रूपाली भाटकार, फोंडा, गोवा.
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