
मुंबई, 3 अगस्त (वार्ता.) – वर्तमान में बच्चों को ‘जंक फूड’ (जैसे पिज्जा, बर्गर आदि) का बहुत अधिक आकर्षण है । जंक फूड स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है । जंक फूड से बचने तथा छात्रों में भारतीय पारंपरिक पौष्टिक अनाज एवं सब्जियों के प्रति आकर्षण पैदा करने और उनके स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए, दादर (पूर्व) स्थित ‘बंगाली एजुकेशन सोसाइटी स्कूल’ ने भारतीय पौष्टिक खाद्य पदार्थ प्रतियोगिता का एक अनूठा कार्यक्रम आयोजित किया । छात्रों के पौष्टिक आहार के प्रति अभिभावकों एवं समाज में जागरूकता लाने के लिए, स्कूल ने पौष्टिक खाद्य पदार्थों की प्रतियोगिता आयोजित की तथा उसमें अभिभावकों को सम्मिलित किया । यह प्रतियोगिता 2 अगस्त को स्कूल में आयोजित की गई थी ।

इस प्रतियोगिता में भारतीय पारंपरिक पौष्टिक अनाज तथा सब्जियों से आकर्षक खाद्य पदार्थ बनाने पर बल दिया गया था । कक्षा १ से ४ तक के छात्रों के अभिभावकों के १५ समूह प्रतियोगिता में सम्मिलित हुए थे । अभिभावक भारत के विभिन्न प्रांतों से स्वयं बनाए हुए खाद्य पदार्थ लाए थे । ‘साउथ इंडियन वेलफेयर सोसाइटी स्कूल’ की प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्रीदेवी बागायतकर परीक्षक के रूप में उपस्थित थीं । इस प्रतियोगिता में पहले तीन स्थानों पर आने वालों को, साथ ही एक प्रोत्साहन पुरस्कार भी दिया गया । प्रतियोगिता में भाग लेने वाले अभिभावकों को स्कूल की ओर से प्रमाण पत्र तथा उपहार दिए गए । स्कूल के प्राथमिक विद्यालय के सभी शिक्षकों ने इस कार्यक्रम के लिए विशेष प्रयास किए । इस कार्यक्रम में सनातन संस्था की सौ. जान्हवी भदिर्के ने फास्ट फूड तथा जंक फूड से होनेवाली हानियां तथा सात्विक आहार के लाभों के बारे में मार्गदर्शन किया ।

छात्रों में भारतीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों का आकर्षण निर्माण करने के लिए कार्यक्रम ! – शर्मिला दासगुप्ता, प्रधानाध्यापिका, बंगाली एजुकेशन सोसाइटी स्कूल (प्राथमिक विद्यालय)
वर्तमान में छात्रों में जंक फूड का आकर्षण बढ़ गया है । छात्रों की जंक फूड खाने की आदत छुड़ाने तथा उन्हें भारतीय पौष्टिक खाद्य पदार्थ खिलाने के लिए, यह कार्यक्रम विद्यालय में लागू किया गया । विद्यालय के सभी शिक्षकों एवं अभिभावकों के सहयोग से यह कार्यक्रम संभव हो पाया ।
अभिभावकों तथा समाज में पौष्टिक आहार के प्रति जागरूकता आवश्यक ! – पुष्पा नायडू, प्रधानाध्यापिका, बंगाली एजुकेशन सोसाइटी स्कूल (माध्यमिक विद्यालय)
छात्रों का स्वास्थ्य और उसके लिए पौष्टिक आहार, यह अत्यंत महत्वपूर्ण है । विशेष रूप से प्राथमिक विद्यालयों में छात्रों को जंक फूड का आकर्षण होता है । इसलिए बच्चे अभिभावकों द्वारा दिए गए टिफिन के पदार्थ नहीं खाते हैं । बच्चों को घर के पदार्थ खाने के लिए, उन्हें पसंद आने वाले स्वादिष्ट पदार्थ बनाना आवश्यक है । इसे प्रोत्साहित करने के लिए ‘बंगाली स्कूल’ ने यह कार्यक्रम आयोजित किया । इससे समाज तथा अभिभावकों में जागरूकता पैदा होगी । स्वास्थ्यवर्धक आहार तथा जीवन केवल बोलने का विषय नहीं है, अपितु उसके लिए कार्रवाई आवश्यक है ।
आहार से शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक विकास ! – सौ. जान्हवी भदिर्के, सनातन संस्था

ऋतुओं के अनुसार आहार, भूख लगने पर खाना, भोजन के समय का पालन करना, ऐसे भारतीय आहारशास्त्र के नियम हैं । वर्तमान में इन नियमों का पालन नहीं होता है । आहार से केवल शारीरिक ही नहीं, अपितु बच्चों का मानसिक तथा आध्यात्मिक विकास भी होता है । फास्ट फूड तथा जंक फूड के कारण कैंसर, मोटापा, भूख न लगना आदि गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं । पहले के बच्चों में असफलता सहन करने की क्षमता थी । वर्तमान में असफलता आने पर बच्चे आत्महत्या जैसे चरम कदम भी उठाते हैं । इसके विभिन्न कारण हैं । इसमें आहार भी एक महत्वपूर्ण कारण है । इसलिए अभिभावकों को पौष्टिक तथा सात्विक आहार पर ध्यान देना चाहिए ।
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