
नई दिल्ली – अमेरिका के ‘प्यू रिसर्च सेंटर’ द्वारा दी गई जानकारी में यह सिद्ध किया गया है कि पिछले दस वर्षों में विश्व के चार देशों में ईसाई लोग अल्पसंख्यक बन गए हैं । इसमें यूनाइटेड किंगडम (इंग्लैंड, आयरलैंड और स्कॉटलैंड), फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रगत राष्ट्र, तथा दक्षिण अमेरिका के उरुग्वे देश सम्मिलित हैं । पूरे विश्व में साठ प्रतिशत देश ईसाई बहुल हैं ।
यूनाइटेड किंगडम में ईसाइयों की जनसंख्या उनचास प्रतिशत पर आ गई है । फ्रांस में यह छियालिस प्रतिशत, ऑस्ट्रेलिया में सैंतालीस प्रतिशत, तथा उरुग्वे में ईसाई जनसंख्या चौवालीस प्रतिशत रह गई है । अन्य देश भी इसी मार्ग पर हैं । इसमें नीदरलैंड एवं न्यूजीलैंड सम्मिलित हैं ।
विश्व भर में क्यों घट रही है ईसाई जनसंख्या ?
विश्व में वर्ष दो हजार दस में ईसाई बहुल देशों की संख्या एक सौ चौबीस थी । वह वर्ष दो हजार बीस में, अर्थात दस वर्षों में घटकर एक सौ बीस पर आ गई । यहां की जनसंख्या की वृद्धिदर घट गई है । अनेक लोग नास्तिक हो गए हैं । कुछ ने धर्मांतरण कर लिया है । इस कारण इन देशों में ईसाई जनसंख्या बडी मात्रा में घटी है । यहाँ ईसाई अल्पसंख्यक बनते जा रहे हैं । इनमें से अनेक लोग नास्तिक बन गए हैं ।
हिन्दुओं की स्थिति क्या है ?
विश्व में भारत एवं नेपाल ये दो हिन्दू बहुल देश हैं । इनमें भारत में पचानवे प्रतिशत हिन्दू हैं, तथा पाँच प्रतिशत हिन्दू विश्व के कोने-कोने में, विभिन्न देशों में निवास करते हैं । नेपाल में हिन्दुओं की संख्या बडी है । विश्व की कुल जनसंख्या में हिन्दुओं का भाग केवल पंद्रह प्रतिशत है । कहा जाता है कि कुछ अफ्रीकी और यूरोपीय देशों में हिन्दू धर्म के अनुयायी बढ रहे हैं ।
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