
१. २९ सितंबर २००८ : इस दिन मालेगांव में एक मोटरसाइकिल में बम विस्फोट हुआ । इस घटना में कुल ७ लोगों की मृत्यु हुई एवं ९२ लोग घायल हुए थे ।
२. जांच एजेंसी का हस्तांतरण : तत्कालीन गठबंधन सरकार ने इस प्रकरण की जांच आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) को सौंपने की घोषणा की । उस समय एटीएस के प्रमुख हेमंत करकरे थे, जिनकी २००८ के आतंकवादी आक्रमण में मृत्यु हो गई ।
३. बंदी बनाना : विस्फोट में प्रयोग की गई मोटरसाइकिल पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की होने के कारण पुलिस ने उन्हें बंदी बना लिया । अगले कुछ समय में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र (पुणे एवं नाशिक) से भी कुछ लोगों को बंदी बनाया गया ।
४. आरोप पत्र : २० जनवरी २००९ को १४ लोगों के विरुद्ध आरोप पत्र प्रविष्ट किया गया । इसमें ‘मकोका’ (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट) की धाराएं भी लगाई गईं ।
५. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को हस्तांतरण : वर्ष २०१० में इस प्रकरण की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को हस्तांतरित कर दी गई ।
६. मकोका हटाया गया, अभियोग जारी : वर्ष २०१७ में विशेष न्यायालय ने ‘मकोका’ की धाराओं को हटाने की अनुमति तो दी, परंतु साध्वी प्रज्ञा सिंह एवं अन्य ६ लोगों को दोषमुक्त करने की अनुमति नहीं दी । उन पर अन्य धाराओं तथा असंवैधानिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम’ के अंतर्गत अभियोग जारी रहा ।
७. अभियोग का आरंभ : इस प्रकरण में साध्वी प्रज्ञा सिंह सहित ७ मुख्य आरोपियों के विरुद्ध दिसंबर २०१८ में प्रत्यक्ष अभियोग आरंभ हुआ । अभियोग में कुल ३२३ साक्षी उपस्थित हुए, ३४ साक्षी पीछे हटे, तथा कुछ गवाहों की इस अवधि में मृत्यु हो गई ।
८. गवाहों का पलटना : ३२३ गवाहों की जांच की गई, जिनमें से ३४ गवाह जांच के समय पलट गए । पीछे हटे गवाहों में से कई ने न्यायालय को बताया था कि आतंकवाद विरोधी दस्ते ने बलपूर्वक बयान लिखवाए थे ।
९. अंतिम निर्णय : १७ साल उपरांत, यानी ३१ जुलाई को इस प्रकरण का निर्णय आया तथा इसमें ७ आरोपियों को निर्दोष घोषित कर दिया गया ।
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