Justice Yashwant Varma : न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के विरुद्ध महाभियोग लाया जाएगा !

  • न्यायमूर्ति वर्मा के निवास स्थान पर १५ करोड रुपये की नकदी मिलने का प्रकरण

  • १०० सांसदों ने प्रस्ताव पर किए हस्ताक्षर

(महाभियोग का अर्थ : पद से हटाने हेतु की जाने वाली संसदीय प्रक्रिया)


नई दिल्ली – संसद के इस वर्षा सत्र अधिवेशन में न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के विरुद्ध महाभियोग प्रस्ताव लाया जाएगा, ऐसी सूचना केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने दी । १०० से अधिक सांसदों ने इस प्रस्ताव के लिए पहले ही अधिसूचना पर हस्ताक्षर किए हैं, जो कि लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव लाने हेतु आवश्यक मर्यादा से अधिक हैं ।

रिजिजू ने कहा कि न्याय व्यवस्था में भ्रष्टाचार एक अत्यंत संवेदनशील तथा गंभीर विषय है, क्योंकि न्याय व्यवस्था के माध्यम से ही जनसामान्य को न्याय प्राप्त होता है । यदि न्यायपालिका में ही भ्रष्टाचार हो, तो वह सभी के लिए गम्भीर चिंता का विषय है । इसीलिए यशवंत वर्मा को पद से हटाने के प्रस्ताव पर सभी राजनैतिक दलों के हस्ताक्षर होने चाहिए ।

क्या है प्रकरण ?

१४ मार्च २०२५ की रात्रि ११:३५ बजे दिल्ली के ल्युटियन्स क्षेत्र स्थित न्यायमूर्ति वर्मा के आवास में अग्नि लग गई थी । अग्निशमन दल के कर्मचारियों ने उस आग को बुझाया । घटना के समय न्यायमूर्ति वर्मा नगर से बाहर थे । २१ मार्च को कुछ समाचार माध्यमों ने यह दावा किया कि न्यायमूर्ति वर्मा के घर से १५ करोड रुपये की नकदी प्राप्त हुई है । अनेक नोटें जल चुके थे । इसका एक दृश्य-चित्र (वीडियो) भी प्रसारित हुआ था ।
२२ मार्च को तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना ने न्यायमूर्ति वर्मा पर लगे आरोपों की आंतरिक जांच हेतु ३ सदस्यीय समिति की स्थापना की थी । इस समिति ने ४ मई को प्रधान न्यायाधीश को अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत कीया, जिसमें न्यायमूर्ति वर्मा दोषी पाए गए । इस प्रतिवेदन के आधार पर प्रधान न्यायाधीश खन्ना ने शासन को न्यायमूर्ति वर्मा को पद से हटाने की अनुशंसा की थी ।
१८ जुलाई को न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका प्रविष्ट की, जिसमें उन्होंने आंतरिक समिति के प्रतिवेदन तथा महाभियोग की अनुशंसा को निरस्त करने की बिनती की ।