सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार

‘मुसलमानों और ईसाइयों के धार्मिक उत्सव के समय लोगों को इकट्ठा करने के लिए नाटक, चलचित्र, वाद्यवृंद जैसे कार्यक्रम नहीं रखने पडते । इसके विपरीत हिन्दुओं के धार्मिक उत्सव के समय ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करना पडता है । इससे प्रश्न निर्माण होता है कि, ‘क्या हिन्दू केवल मनोरंजन के लिए धार्मिक उत्सव मनाते हैं ?’
– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक संपादक, ʻसनातन प्रभातʼ नियतकालिक
सात्त्विकता एवं संगठन ही राष्ट्र के उत्कर्ष की चाबी – जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी
परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी द्वारा साधकों को किया गया अनमोल मार्गदर्शन !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की विभिन्न कृतियों से प्रक्षेपित स्पंदनों का अध्ययन
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के माथे पर अंकित कमल सुस्पष्टता से दिखाई देने का कारण !
संतों के जन्मदिन पर ही भारत तथा बंगाल स्वतंत्र होने का एक दैवी संकेत ।