‘साधकों की साधना खंडित करने हेतु अनिष्ट शक्तियां साधकों पर सूक्ष्म से आक्रमण करती हैं । अनिष्ट शक्तियों के कारण होनेवाले कष्ट दूर करने हेतु साधकों को प्राणशक्तिवहन उपायपद्धति के अनुसार उपाय करते समय नामजप खोजना पडता है । उसमें साधकों को उनकी कष्ट की तीव्रता के आधार पर निम्न नामजपों में से कोई नामजप मिलता है –

१. अनिष्ट शक्तियों द्वारा ‘सगुण-निर्गुण’ स्तर का आक्रमण हो रहा हो, तो पंचतत्त्वों में से तेजतत्त्व, वायुतत्त्व अथवा आकाशतत्त्व इन में से किसी तत्त्व का नामजप मिलता है । तेजतत्त्व, वायुतत्त्व एवं आकाशतत्त्व इस क्रम में आकाशतत्त्व सबसे उच्च तथा अधिक निर्गुण स्तर का है । आकाशतत्त्व का जाप मिलता है, इसका अर्थ अनिष्ट शक्तियों का आक्रमण बढा है ।
२. अनिष्ट शक्तियों द्वारा ‘निर्गुण-सगुण’ स्तर का आक्रमण हो रहा हो, तो ‘शून्य’, ‘महाशून्य’, ‘निर्गुण’ अथवा ‘ॐ’ इनमें से कोई नामजप मिलता है । ‘शून्य’, ‘महाशून्य’, ‘निर्गुण’ एवं ‘ॐ’ इन जपों के क्रम में ‘ॐ’ सबसे उच्च एवं सबसे अधिक निर्गुण स्तर का नामजप है । उपायों में ‘ॐ’ का नामजप मिला है, इसका अर्थ ‘अनिष्ट शक्तियों ने सबसे उच्च स्तर का आक्रमण किया है’, ऐसा मान लें ।
वर्तमान समय में (जून २०२५ में) आध्यात्मिक उपाय करते समय ऐसा ध्यान में आया कि ‘अधिकांश बार ‘ॐ’, यह नामजप मिल रहा है ।’ इससे पूर्व ‘महाशून्य’ अथवा अधिक से अधिक ‘निर्गुण’, यह नामजप मिलता था । इससे ध्यान में आता है, ‘अनिष्ट शक्तियां अब आक्रमण करने के लिए एडीचोटी का जोर लगा रही हैं ।’
जैसे साधकों की साधना बढती जाती है, वैसे अनिष्ट शक्तियों को आक्रमण करने हेतु अधिक से अधिक शक्ति लगानी पडती है । वर्तमान समय में आध्यात्मिक उपाय करने हेतु ‘ॐ’, यह नामजप मिलने का अर्थ है अब अनिष्ट शक्तियां आक्रमण करने के लिए उनकी सर्वाेच्च शक्ति का उपयोग कर रही हैं । इसमें भी जब वे हार जाएंगी, उस समय वे सूक्ष्म से आक्रमण करना छोडकर स्थूल से आक्रमण करना आरंभ करेंगी तथा उस समय तीसरा विश्वयुद्ध आरंभ होगा । तीसरे विश्वयुद्ध में ईश्वर की कृपा से धर्म की विजय होने पर ईश्वरीय राज्य की अर्थात हिन्दू राष्ट्र की स्थापना होगी । अतः साधको, अब धर्म की विजय होने हेतु और तीव्रता से साधना कर अनिष्ट शक्तियों का आक्रमण तोड डालें !’
– (सद्गुरु) डॉ. मुकुल गाडगीळ (रसायन विज्ञान में पीएच्.डी., मुंबई विश्वविद्यालय), महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय, गोवा. (२४.६.२०२५)
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