मुंबई – महायुती सरकार के कार्यकाल में हिन्दी भाषा को अनिवार्य बनाने के विषय में लिए गए दोनों सरकारी निर्णय निरस्त किए गए हैं तथा मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य में त्रिभाषा सूत्र के विषय में निर्णय लेने के लिए मराठी भाषा के अध्येता डॉ. नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है, ऐसी घोषणा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की । विधानसभा के वर्षाकालीन अधिवेशन के पूर्वसंध्या पर की गई पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह जानकारी दी । इस पत्रकार वार्ता में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे एवं उपमुख्यमंत्री अजित पवारसहित अन्य मंत्री उपस्थित थे ।
त्रिभाषा सूत्राच्या मुद्यावर डॉ. नरेंद्र जाधव यांच्या अध्यक्षतेखाली विशेषज्ज्ञांची समिती नेमली जाईल, त्या समितीच्या अहवालानंतर त्रिभाषा सूत्राबद्दल अंतिम निर्णय घेतला जाईल.
(पत्रकार परिषद | मुंबई | 29-6-2025) #Maharashtra #Mumbai #मराठी pic.twitter.com/2q2NpftiOJ
— Devendra Fadnavis (@Dev_Fadnavis) June 29, 2025
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आगे कहा, ‘‘डॉ. नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में गठित इस समिति में अन्य भी सदस्य होंगे । यह समिति डॉ. माशेलकर समिति द्वारा दिए गए ब्योरे का अध्ययन करेगी तथा उसके उपरांत छात्रों के हित में निर्णय लेगी । हमारे लिए मराठी तथा मराठी भाषी छात्र महत्त्वपूर्ण हैं । हमारी नीति मराठी एवं मराठी छात्र केंद्रित होगी । इसमें हमें किसी प्रकार की राजनीति नहीं करनी है ।’’
🚫 Hindi Language Imposition Rolled Back in Maharashtra!
CM Devendra Fadnavis announces the rollback of two Govt Resolutions issued during the Mahayuti government’s tenure that mandated Hindi! 🗣️🇮🇳
Instead, a new committee led by Dr. Narendra Jadhav will decide on a… pic.twitter.com/nOSV6UK5WS
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) June 29, 2025
इस अधिवेशन में १२ नए विधेयक लाए जाएंगे !
‘वर्षाकालीन अधिवेशन में १२ नए विधेयक लाए जाएंगे । इसके अतिरिक्त १ लंबित विधेयक तथा संयुक्त समिति के पास भेजा गया जनसुरक्षा विधेयक होगा । संयुक्त समिति ने बहुमत से यह विधेयक जनसुरक्षा विधेयक पारित किया है । हमारे पास बहुमत होने पर भी हम चर्चा से नहीं भागेंगे । विरोधियों के प्रत्येक प्रश्न का हम उत्तर देंगे’, ऐसा देवेंद्र फडणवीस ने कहा ।
महाविकास आघाडी ने ही हिन्दी एवं अंग्रेजी भाषा को अनिवार्य बनाने की अनुशंसा स्वीकार की !
उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्रीपद के कार्यकाल में डॉ. माशेलकर ने १४ सितंबर २०२१ को प्रस्तुत ब्योरा स्वीकार किया गया । ७ जनवरी २०२२ को हुई मंत्रिमंडल की बैठक का इतिवृत्त तैयार है । १८ विशेषज्ञों ने १००१ पृष्ठोंवाला यह ब्योरा स्वीकार किया । इस ब्योरे पर उद्धव ठाकरे के हस्ताक्षर हैं । उस समय ‘त्रिभाषासूत्र बाजू में रखने की भूमिका उद्धव ठाकरे ने नहीं ली ।
डॉ. माशेलकर समिति द्वारा दिए गए ब्योरे के आधार पर कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस तथा उद्धव ठाकरे की महाविकास आघाडी ने सरकारी निर्णय लिया है । इसमें अंग्रेजी एवं हिन्दी भाषा को अनिवार्य बनाया गया । महाविकास आघाडी के शासनकाल में लिए गए निर्णय के आधार पर ही हमने १७ जून २०२५ को सरकारी निर्णय जारी किया । उसमें तीसरी भाषा के चयन की स्वतंत्रता दी गई है, ऐसा देवेंद्र फडणवीस ने कहा ।
५ जुलाई को निकाला जानेवाला मोर्चा निरस्त
The government’s harsh Hindi directive has been cancelled!
This is a victory for Marathi unity.
The fear of Thackeray factions coming together.
Now, the joint march planned on July 5 will not take place;
But something else is quietly in the works.
Thackeray is still the brand! pic.twitter.com/aeJyeEp0bv— Sanjay Raut (@rautsanjay61) June 29, 2025
राज्य सरकार द्वारा हिन्दी भाषा को अनिवार्य बनाने का निर्णय निरस्त किए जाने पर इसके विरोध में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना तथा शिवसेना उद्धव बाळासाहेब ठाकरे गुट की ओर से ५ जुलाई को आयोजित किया गया मुंबई के गिरगांव चौपाटी से आजाद मैदान तक का मोर्चा निरस्त किया गया है, इस विषय में सांसद संजय राऊत ने एक्स पर पोस्ट कर जानकारी दी ।
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