
अमृतसर (पंजाब) – भारत ने पाक के साथ का सिंधु जल बंटवारा समझौता रहित करने से पाक की कृषि की हानि होने लगी है, वहीं दूसरी ओर भारत में ही ऐसी स्थिति निर्मित करने का प्रयत्न जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला कर रहे हैं । उमर अब्दुल्ला ने पंजाब एवं अन्य राज्यों को सिंधु नदी का पानी देना अस्वीकार किया है ।
१. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रसार माध्यमों को बताया कि, जम्मू-कश्मीर में सिंधु, झेलम एवं चिनाब इन नदियों का पानी प्रथम राज्य के लोगों के लिए उपयोग किया जाएगा एवं उसके पश्चात ही वह अन्य किसी को देने का विचार किया जाएगा ।
२. पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान इन राज्यों के लिए पानी ले जाने के प्रस्तावित ११३ कि.मी. लंबाई के नहर का विरोध करते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जब हमें उझ एवं शाहपूर कांडी परियोजनाओं पर सहायता की आवश्यकता थी, तब पंजाब ने हमें प्रतीक्षा करने पर विवश किया । अब हम उन्हें पानी क्यों दें ?
पानी राष्ट्रीय संपत्ति एवं उस पर पंजाब का समान अधिकार ! – आम आदमी पक्ष की आलोचना

आम आदमी पक्ष (आप) के प्रवक्ता नील गर्ग ने इस पर तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सिंधु नदी के पानी के संदर्भ में एकतरफा निर्णय लेने का अधिकार उमर अब्दुल्ला को नहीं है । यह पानी राष्ट्रीय संपत्ति है एवं उस पर पंजाब का समान अधिकार है । नदी के पानी बंटवारे जैसे महत्वपूर्ण सूत्र पर निर्णय लेने का अधिकार केवल केंद्र सरकार को है । पंजाब यह एक सीमावर्ती राज्य है, जो प्रत्येक युद्ध में देश का रक्षण करने में अग्रीम रहता है । यह राज्य देश के अन्न भंडार भरता है; परंतु इस प्रयत्न में पंजाब का भूजल संकट में आ गया है । भारत ने पाक के साथ का सिंधु जल बंटवारा समझौता स्थगित करने के पश्चात सिंधु नदी के पानी का समान बंटवारा सुनिश्चित करना एवं पंजाब को उसका अधिकार देना, यह केंद्र सरकार का दायित्व है ।
संपादकीय भूमिकाउमर अब्दुल्ला को ऐसा अधिकार किसने दिया ? केंद्र सरकार के पास इसका दायित्व होते हुए भी अब्दुल्ला इस प्रकार का वक्तव्य दे रहे हैं, तो उन पर देशद्रोह का अपराध पंजीकृत किया जाना चाहिए ! |
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