केवल कानून नहीं, अपितु पूरी व्यवस्था को ही बदल देना चाहिए ! – अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन

अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले नगरी, फोंडा, गोवा : हिन्दुओं पर किए गए आघातों से संबंधित अभियोग अभी भी न्यायालयों में लंबित हैं । इन अभियोगों पर निर्णय आने में कितना समय लगेगा, यह हम सभी को सुनिश्चित करना है । वर्तमान समय में देश की व्यवस्था हिन्दूविरोधी है । संसद में जब वक्फ बोर्ड संशोधन कानून पारित हुआ, तब सर्वोच्च न्यायालय में उसके विरोध में प्रविष्ट की गई याचिकाओं पर विचार करते समय सर्वाेच्च न्यायालय यह विचार करता है कि किस प्रकार इस कानून पर रोक लगाई जाए; परंतु संसद में पारित कानून को रोका ही नहीं जा सकता । इन सभी घटनाओं से यह ध्यान में आता है कि केवल कानून ही नहीं, अपितु पूरी हिन्दूविरोधी व्यवस्था ही बदलनी चाहिए, ऐसा प्रखर प्रतिपादन ‘हिन्दू फ्रंट फॉर जस्टीस’ के प्रवक्ता तथा सर्वाेच्च न्यायालय के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने किया । १८ मई को ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ के दूसरे दिन ‘सनातन राष्ट्र पथदर्शन’ कार्यक्रम संपन्न हुआ । उसमें वे उपस्थित धर्मप्रेमियों को संबोधित करते हुए ऐसा बोल रहे थे । इस अवसर पर व्यासपीठ पर केंद्रीय सूचना विभाग के पूर्व आयुक्त तथा ‘सेव कल्चर, सेव भारत’ के संयोजक श्री. उदय माहुरकर, ‘नेशनल सेंटर फॉर हिस्टॉरिकल रिसर्च एंड एनालिसिस’ के अध्यक्ष श्री. नीरज अत्री, सनातन संस्था के प्रवक्ता श्री. अभय वर्तक तथा हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे भी उपस्थित थे ।

अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने आगे कहा, ‘‘हिन्दुओं की समझ में आए बिना बहुत बडे हिन्दूविरोधी कानून बनाए गए हैं । संविधान के अनुच्छेद २९-३० में अनेक असंवैधानिक त्रुटियां हैं । अनुच्छेद ३० का दुरुपयोग किया जा रहा है । अनुच्छेद २६ के अनुसार मस्जिदें तथा चर्च सरकारी अधिग्रहण की कक्षा से बाहर हैं; परंतु हिन्दुओं के मंदिरों का अधिग्रहण करते समय इसी अनुच्छेद को बाजू में रखा जाता है । शिवजी का मंदिर गिराने का आदेश देते समय देहली उच्च न्यायालय कहता है कि शिवजी हमें क्षमा करें ! हिन्दू समाज द्वारा इस लडाई के लिए दबावसमूह बनाने पर ही हम अपने मंदिरों को सुरक्षित रख सकते हैं । धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद जैसे शब्दों की व्याख्या न्यायाधीशों को भी ठीक से ज्ञात नहीं है । अल्पसंख्यक आयोग असंवैधानिक होते हुए भी उस विषय में कोई नहीं समझता, जो दुर्भाग्यपूर्ण है । वर्तमान में देश के सहस्रों अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों में दी जानेवाली सुविधाओं का लाभ उठाने हेतु हिन्दू धर्मी धर्म-परिवर्तन कर उनमें प्रवेश ले रहे हैं । देहली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के घर में पैसों का ढेर मिलता है; परंतु उसके विरुद्ध एक सामान्य शिकायत भी पंजीकृत नहीं होती । संबंधित न्यायाधीश त्यागपत्र नहीं देते । जांच समिति असफल सिद्ध होती है । संबंधित न्यायाधीश स्वयं ऐसा कहते हैं कि ‘मैं मेरा पद नहीं छोडूंगा ।’ न्यायालयों में यदि ऐसे न्यायाधीश होंगे, तो हिन्दुत्वनिष्ठ अधिवक्ता कैसे लड पाएंगे ? हमारा हिन्दू राष्ट्र शस्त्रसंधि करनेवाला नहीं, अपितु पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान सहित अखंड हिन्दू राष्ट्र निर्माण करनेवाला सनातन राष्ट्र होना चाहिए । हम हिन्दू हमारी आस्था के केंद्रों के प्रति अत्यंत सहिष्णु एवं शांत हैं । सभी हिन्दुओं को यह जोरदार मांग करनी चाहिए कि हमारे आस्था के केंद्र मुक्त होने चाहिए ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के कारण हमारे जीवन में बडे परिवर्तन आए हैं ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी

सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव में १७ मई से मुझे यह अनुभूति हो रही है कि इस गोमंतकीय भूमि में हिन्दू राष्ट्र का इतिहास लिखा जा रहा है । समस्त हिन्दू समाज की ओर से हम सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा किए गए इस आदर्श आयोजन के लिए धन्यवाद दे रहे हैं । वर्ष २०१३ में हम अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन में आए थे, तब से सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी हमारे गुरु हैं तथा हमें उनके आशीर्वाद प्राप्त हुए हैं । उनके कारण हमारे जीवन में बडे परिवर्तन आए हैं । उससे अयोध्या, काशी, मथुरा, ज्ञानवापी एवं संभल की न्यायालयीन लडाईयों में हमें एक नई ऊर्जा मिल रही है । इसके लिए सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के चरणों में हम कृतज्ञ हैं । सनातन संस्था एवं महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय आगे जाकर बडे आध्यात्मिक केंद्र बनेंगे । समस्त हिन्दुत्वनिष्ठों की ओर से मैं सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति के प्रति आभार व्यक्त करता हूं ।

– अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन

भारत में फैल रहे काल्पनिक ईसाई पंथ का प्रसार रोकने हेतु अध्ययनपूर्ण लडाई आवश्यक ! – नीरज अत्री, अध्यक्ष, नेशनल सेंटर फॉर हिस्टॉरिकल रिसर्च एंड एनालिसिस

श्री. नीरज अत्री

वर्तमान में हिन्दुओं के सामने जैसे जिहाद का संकट है, उससे भी बडा संकट ईसाई पंथ ने खडा किया है । धर्मांतरण का उनका कार्य अत्यंत संकटकारी है; परंतु ऊपर से वह दिखाई नहीं देता ।

ईसाई पंथ ने विगत २०२५ वर्षाें से विश्व को मूर्ख बनाया । उन्होंने एक कहानी रचकर क्रिसमस, ईस्टर जैसे त्योहार मनाने की प्रथा स्थापित की; परंतु विश्व को अब यह सच्चाई बताने का समय आ चुका है । जो देश सदैव सच की खोज करता है तथा जो देश अनुभवसिद्ध ज्ञान को अधिक महत्त्व देता है, उस देश में केवल एक ही पुस्तक में दी गई जानकारी सच होने की बात कहकर धर्म-परिवर्तन किया जा रहा है । ईसाई पंथ असत्य पर आधारित है, इस बात को पश्चिमी देशों के अधिकांश इतिहासकारों ने सप्रमाण स्पष्ट किया है ।

सूली पर लटकाए जाने के उपरांत यीशु की मृत्यु हुई; और ३ दिन उपरांत वे पुनर्जीवित हो गए । ऐसी झूठ पर आधारित कहानियां बताकर इस देश में क्रिसमस मनाने की प्रथा स्थापित की गई ।

सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव के दूसरे दिन १ करोड श्रीरामनाम का संकल्प पूर्ण !

सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ८३वें जन्मोत्सव तथा सनातन संस्था के रजत जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में फोंडा, गोवा के अभियांत्रिकी महाविद्यालय के प्रांगण पर भव्य एवं दिव्य ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ भावपूर्ण वातावरण में संपन्न हो रहा है । इस महोत्सव के पहले एवं दूसरे दिन श्रीरामनाम जपयज्ञ संपन्न हुआ । इस अवसर पर उस्थित साधक, हिन्दुत्वनिष्ठ तथा उपस्थित धर्मप्रेमी, इन सभी ने भावपूर्ण पद्धति से यह जपयज्ञ संपन्न किया । इस नामयज्ञ के कारण महोत्सव का संपूर्ण परिसर चैतन्यमय बन गया ।                        

सांस्कृतिक आक्रमण एवं संस्कृति का हनन करनेवालों पर कठोर प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए ! – श्री. उदय माहुरकर, ‘सेव कल्चर सेव भारत’

श्री. उदय माहुरकर

देश पर होनेवाला सांस्कृतिक आक्रमण सबसे बडा संकट है । सामाजिक माध्यम, ‘ओटीटी, पोर्नाेग्राफी (अश्लीलता) के माध्यम से अश्लील फिल्में दिखाकर हमारी संस्कृति पर सीधा आक्रमण किया जा रहा है । ऐसी बातें तैयार करनेवाले लोग ही बलात्कार की घटनाओं को प्रोत्साहन दे रहे हैं । देश में होनेवाली बलात्कार की ८० प्रतिशत घटनाएं ऐसी अश्लील फिल्में देखकर हो रही हैं । इस सांस्कृतिक आक्रमण को तोड डालने के लिए संस्कृति का हनन करनेवालों पर कठोर प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता है, यह हमारी मांग है ।

अ. ‘इंडिसेंट रिप्रेजेंटेशन ऑफ वूमेंस एक्ट’ के अंतर्गत ३ वर्ष के स्थान पर १० वर्ष के दंड का प्रावधान किया जाए तथा इस अपराध में ३ वर्ष तक जमानत न दी जाए । ३ वर्ष तक जमानत न मिलना आतंकियों के लिए बनाया गया नियम है तथा अब यही नियम सांस्कृतिक आतंकियों पर भी लागू किया जाना चाहिए ।

आ. ‘लॉ ऑफ एथिक्स कोड’ तैयार कर फिल्मों में दिखाए जानेवाले दृश्य, शरीर प्रदर्शन तथा भाषा पर मर्यादाएं होनी चाहिए तथा इन मर्यादाओं को लांघने पर १० से २० वर्ष के दंड का प्रावधान किया जाना चाहिए ।


परशुराम भूमि में संपन्न शंखनाद से सनातन राष्ट्र निश्चित ही आएगा ! – रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिन्दू जनजागृति समिति

श्री. रमेश शिंदे

बांग्लादेश में शेख हसीना सरकारविरोधी हुए आंदोलन में हिन्दुओं को ही लक्ष्य बनाकर मारा गया । कश्मीर, केरल एवं बंगाल से हिन्दू मिटते जा रहे हैं । कर्नाटक में हिन्दुत्वनिष्ठ कार्यकर्ताओं को चुन-चुनकर मार डाला जा रहा है । कुछ दिन पूर्व पहलगाम में किए गए आक्रमण में हिन्दू पर्यटकों से उनका धर्म पूछकर उनकी हत्याएं की गईं । प्रत्येक स्थान पर हिन्दुओं को ही लक्ष्य बनाया जा रहा है, ऐसे में हिन्दू समाज में जागृति लाने की अपेक्षा उसपर उपाय करना आवश्यक है । इस ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ के माध्यम से सनातन राष्ट्र की स्थापना हेतु लडने के लिए तैयार होना पडेगा । जब यह शंखनाद छत्रपति शिवाजी महाराज ने किया, तब हिन्दवी स्वराज साकार हुआ । अब यही शंखनाद परशुराम भूमि में हुआ है, तो सनातन राष्ट्र का आना निश्चित ही है ।


सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी भगवान परशुराम का कार्य कर रहे हैं ! – अभय वर्तक, प्रवक्ता, सनातन संस्था

श्री. अभय वर्तक

सनातन राष्ट्र का शंखनाद करने हेतु सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी ने इस भव्य महोत्सव का आयोजन किया है । इस चरण तक पहुंचने के लिए सनातन को अनेक संकटों से गुजरना पडा । अनेक विरोधियों तथा बडे-बडे अन्वेषण विभागों ने सनातन संस्था को मिटाने का प्रयास किया, तब भी सनातन संस्था मिटी नहीं । वही सनातन संस्था आज सनातन राष्ट्र का शंखनाद कर रही है; क्योंकि इस संस्था को भगवान श्रीकृष्ण के आशीर्वाद प्राप्त हैं । गोवा भगवान परशुराम की भूमि है । भगवान परशुराम का कार्य वर्तमान में सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी कर रहे हैं । सनातन के प्रत्येक साधक का रोम-रोम राष्ट्र एवं धर्म के प्रेम से ओतप्रोत है । सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी ने साधकों को मूर्तिकार की भांति तैयार कर ईश्वरस्वरूप बनाया है; इसके लिए उनके प्रति चाहे कितनी भी कृतज्ञता व्यक्त की जाए, अल्प ही है ।