मध्य रेलमार्ग पर स्थित दिवा से कोपर रेल स्थानकों के मध्य की घटना !

मुंबई – कसारा से छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस की ओर जानेवाली लोकलगाडी से यात्रा करनेवाले १३ यात्री गाडी से नीचे गिर गए । इनमें से ५ यात्रियों की मृत्यु हो गई, जबकि शेष ९ यात्री गंभीररूप से घायल हुए । ९ जून को सवेरे ९.३० बजे मध्य रेल्वे के दिवा से कोपर रेल स्थानक के मध्य यह घटना हुई । घायल यात्रियों पर कळवा के छत्रपति शिवाजी महाराज के चिकित्सालय में उपचार किए जा रहे हैं । ५ पुरुषों तथा २ महिलाओं का स्वास्थ्य स्थिर है, २ लोगों को मस्तिष्क पर चोट आने से उन्हें ज्युपिटर चिकित्सालय में भर्ती किया गया है, जबकि एक पुरुष की मृत्यु हाे गई । ठाणे जिला सरकारी चिकित्सालय में भर्ती किए गए ३ यात्रियों की मौत हो गई ।
मध्य रेल्वे के जनसंपर्क अधिकारी स्वप्नील नीला ने पत्रकार वार्ता में बताया, ‘‘कसारा से छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस जानेवाली लोकल गाडी यात्रियों से खचाखच भरी हुई थी । कुछ यात्री प्रवासी डिब्बे के ‘फूटबोर्ड’ पर (डिब्बे में चढने हेतु उपयोग की जानेवाली छोटी सीढी पर) खडे रहकर यात्रा कर रहे थे । उसी समय सामने से छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से डाऊन दिशा में जानेवाली एक लोकल आई । ये दोनों लोकल गाडियां एक-दूसरे की बाजू से जा रही थीं, जहां २ रेल पटरियों की दूरी कम है । अनेक यात्री दरवाजे पऱ खडे थे । उनकी पीठ पर बैग थे । यह यात्री दूसरी लोकल से घीस गए तथा उनके बैग दूसरी लोकल से टकराए । उसके कारण दरवाजे पर खडे १३ यात्री नीचे गिरे । उस लोकल गाडी के यात्रियों ने तथा गार्ड ने हमें दूरभाष से इसकी जानकारी दी । उसके तुरंत बाद हमने यात्रियों के लिए एंबुलेंस भेजी । ९.५० पर एंबुलेंस तथा रेल्वे के अधिकारी-कर्मचारी घटनास्थल पहुंचे । घायल यात्रियों को चिकित्सालय ले जाया गया ।’’
घातक मोड पऱ तीव्रगति की लोकल चलाना अनुचित !
मुंब्रा यात्री संगठन के अध्यक्ष शेख ने कहा, ‘‘दिवा-मुंब्रा मार्ग पर एक मोड बहुत घातक है । उसके कारण इस मोड से तीव्रगति की लोकल चलाना अनुचित है । मध्य रेल्वे प्रशासन यहां से तीव्रगति में लोकल क्यों चलाता है ?, यही समझ में नहीं आता । कसारा से आनेवाली गाडी यात्रियों से खचाखच भरी हाते है । ऐसी खचाखच भरी गाडी को इस मोड से चलाना बहुत घातक है । ’’
दुर्घटना के उपरांत ‘जागे’ मध्य रेलवे के, दिखाने के लिए निर्णय !
१. नई गाडियों में ‘ऑटोमैटिक डोअर क्लोजर’ (दरवाजों को अपनेआप बंद करनेवाली व्यवस्था) होगी । (पहले ही इन गाडियों में बहुत भीड होती है, जिससे अंदर हवा भी नहीं आती । ऐसी स्थिति में दरवाजे बंद होने पर क्या लोग सांस भी ले पाएंगे ?, क्या इस पर रेल्वे ने विचार किया है ? दूसरी बात यह कि कोई दुर्घटना होने के उपरांत ही रेल्वे प्रशासन को ऐसे उपाय क्यों सूझते हैं ? क्या दुर्घटना होने से पूर्व रेल्वे का प्रशासन सोया हुआ होता है ? – संपादक)
२. वर्तमान लोकल गाडियों में भी ‘ऑटोमैटिक डोअर’ लगाने के संदर्भ में विचार किया जाएगा ।
३. कल्याण कसारा तक तीसरी तथा चौथी लाइन, जबकि कुर्ला तक पांचवीं तथा छठी लाइन प्रस्तावित है । (इस निर्णय को अनेक वर्ष बीत जाने पर भी यह परियोजना अभी तक पूरी क्यों नहीं हुई है ?, इसका रेल्वे प्रशासन को स्पष्टीकरण देना चाहिए ! – संपादक)
४. ठाणे से छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस छठी लाईन तक ‘अपग्रेड’ किया जाएगा । (यह व्यवस्था पूरी होने तक मुंबई की जनसंख्या और कितनी बढेगी, इस पर क्या किसी ने विचार किया है ? – संपादक)
५. सरकारी तथा निजी कार्यालयों को काम का एक ही समय न रखकर भिन्न-भिन्न रखना चाहिए ! (यह विगत अनेक वर्षाें से बताया जा रहा सूत्र है । अभी तक इसका क्या क्रियान्वयन हुआ है, यह कौन बताएगा ? – संपादक)
बाहर से आनेवाले लोगों की भीड के कारण रेलसेवा अस्तव्यस्त हुई है ! – राज ठाकरे

हमारे यहां बाहर से आए लोगों की भीड के कारण रेलव्यवस्था अस्तव्यस्त हुई है । रेल्वे सेवा की स्थिति विकट है, यातायात की स्थिति विकट है । लोगों को पैदल चलने के लिए फूटपाथ नहीं हैं । वाहनों के लिए सडकें नहीं हैं । मेट्रो, मोनो तथा अन्य सुविधाओं से इस समस्या का समाधान नहीं हो पाएगा । लोकल में लोग अंदर कैसे घुस जाते हैं तथा बाहर कैसे निकलते हैं ? आप सायंकाल में मुंबई की लोकल से यात्रा करके तो देखिए । यदि लोकल को दरवाजे लगाए गए, तो लोग अंदर घुटकर मर जाएंगे । लोकल गाडियों में कितनी भीड होती है ?, क्या आप यह जानते हैं ? लोकल गाडियों में एक दरवाजा अंदर आने के लिए तथा दूसरा बाहर निकलने के लिए होना चाहिए । हमारे देश में मनुष्य का कोई मूल्य ही नहीं है, ऐसी आलोचना मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने इस दुर्घटना पर बोलते हुए की ।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मृतकों को दी श्रद्धांजली !

इस दुर्घटना में ५ लोगों की मृत्यु होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है । मैं मृतकों को भावभीनी श्रद्धांजली समर्पित करता हूं । हम उनके परिजनों के दुख में सहभागी हैं । घायल यात्रियों की शीघ्र स्वस्थ होने की मैं कामना करता हूं । यह घटना निश्चितरूप से किस कारण हुई है ?, इसकी रेल्वे विभाग ने जांच आरंभ की है, ऐसा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा ।
घायलों को बचाने के लिए सर्वाेपरि प्रयास जारी ! – उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे

इस घटना में जो घायल हुए हैं, उन्हें बचाने का हम सर्वाेपरि प्रयास करेंगे । राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को ५ लाख रुपए की आर्थिक सहायता घोषित की है । घायलों को उनकी स्थिति के अनुसार ५० सहस्र, १ लाख अथवा २ लाख रुपए दिए जाएंगे, साथ ही उन पर सरकारी खर्चे से उपचार किए जाएंगे, ऐसा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा ।
दिवा से सी.एस्.एम्.टी. तक तीव्रगति लोकल आरंभ कीजिए ! – शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने की मांग

लोकल गाडियों में भीड अल्प हो तथा दुर्घटनाओं पर नियंत्रण रखने के लिए दिवा से सी.एस्.एम्.टी. तीव्रगति लोकल चलाई जाए, ऐसी मांग कल्याण लोकसभा चुनावक्षेत्र के सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने रेल्वे प्रशासन से की है । कल्याण के आगे तीसरी तथा चौथी मार्गिका तैयार करने का काम चल रहा है तथा इसके लिए भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है । जब लोकल की आवाजाही बढेगी, उस स्थिति में भीड को नियंत्रित करना सुलभ बन जाएगा । इसमें नई मार्गिकाएं बढानेसहित १२ डिब्बोवाली लोकल गाडियों को १५ डिब्बोंवाली गाडियों में रूपांतरित करना उतना ही आवश्यक है ।
अन्य प्रतिक्रियाएं
दिनेश पैठणकर, निवासी नायब तहसीलदार, ठाणे – दुर्घटना की जानकारी मिलते ही हम सहायता हेतु सक्रिय हुए । हम मृतकों तथा घायलों के परिजनों से संपर्क करने का प्रयास कर रहे हैं ।
सांसद नरेश म्हस्के, शिवसेना – यह घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है । प्रशासन को इस दुर्घटना के कारणों की जांच करनी चाहिए । यह घटना भीड के कारण हुई है, ऐसा दिखाई देता है । खडे यात्रियों को धक्का किसने मारा ?, इसकी भी जानकारी ली जानी चाहिए ।
पूर्व सांसद राजन विचारे (ठाकरे गुट) – मुंबई से कल्याण मार्ग पर लोकल सेवा कम पड रही है । लोगों को अपने प्राण संकट में डालकर यात्रा करनी पडती है । लोकल में बहुत भीड होती है, उसके कारण लोकल की आवाजाही बढानी चाहिए ।
पूर्व सांसद किरीट सोमय्या, भाजपा – ठाणे से डोंबिवली परिसर में जिस गति से जनसंख्या बढी है, उस अनुपात में हम यातायात सेवाएं बढा नहीं पाए हैं; इसीलिए देवेंद्र फडणवीस सरकार ने मेट्रो के काम पर अधिक ध्यान केंद्रित किया है । लोकल की सभी गाडियों में १५ डिब्बे कर उनकी क्षमता बढाने का प्रयास चल रहा है ।
संपादकीय भूमिकामुंबई के लोकल में प्रचंड भीड है, जो सर्वविदित है । ऐसा होते हुए भी आज तक किसी भी राजनीतिक दल ने इस समस्या का जड से समाधान निकालने का प्रयास नहीं किया है । आज जो घटना हुई है, वह पुनः नहीं होगी; इसकी आश्वस्तता नहीं की जा सकती तथा सरकार इसका स्थाई समाधान निकालने का प्रयास करेगी, इसकी भी संभावना नहीं है । यही वास्तविकता है ! |
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