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नासिक – शहर के काठे गली क्षेत्र में अनधिकृत रूप से बनी सातपीर दरगाह को १६ अप्रैल की सुबह ५:३० बजे हटा दिया गया । दरगाह को तोड़ने का कार्य १५ अप्रैल की रात को आरंभ हुआ था। इस अवसर पर मौलवी, गणमान्य नागरिक तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित थे । सतपीर दरगाह को हटाने के मुंबई उच्च न्यायालय के आदेश की भी मौलवियों तथा प्रमुख नागरिकों द्वारा इसी प्रकार की निंदा की गई थी; लेकिन विध्वंस के दौरान ४०० मुसलमानों की भीड़ आई तथा उस पर पत्थरबाजी करने लगी । इससे तनाव उत्पन्न हो गया । इस समय ५०० पुलिसकर्मी तैनात थे ।
पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे !

नासिक के पुलिस उपायुक्त किरण कुमार चव्हाण ने कहा, “जैसे ही दरगाह को तोड़ने का कार्य आरंभ हुआ, उस्मानिया चौक की ओर से मुसलमानों की भीड़ आ गई तथा हंगामा करने लगी ।” दरगाह के न्यासियों तथा गणमान्य नागरिकों ने भीड़ को शांत करने का प्रयास किया । वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी उन्हें समझाया; लेकिन फिर भी उन्होंने पत्थर फेंकना जारी रखा । इसलिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े तथा हल्के लाठीचार्ज से भीड़ को तितर-बितर किया । इस मामले में पंद्रह लोगों को बंदी बनाया गया है । भीड़ द्वारा किये गए पथराव में ३१ पुलिस अधिकारी मामूली रूप से घायल हो गये । “पुलिस ने भीड़ में सम्मिलित संदिग्ध आक्रमणकारियों के ५७ दोपहिया वाहन जब्त कर लिए हैं ।”
अंततः नासिक महानगरपालिका के नोटिस का पालन न करने पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई !

फिलहाल काठे गली क्षेत्र में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है तथा यहां तनावपूर्ण शांति है । दरगाह का ९० प्रतिशत निर्माण ध्वस्त हो चुका है । इस संदर्भ में, काठे गली से भाभानगर जाने वाले यातायात को दूसरे मार्ग पर मोड दिया गया है । नासिक नगर निगम ने सतपीर दरगाह के अनधिकृत निर्माण को १५ दिनों के भीतर हटाने का नोटिस जारी किया था; किन्तु निर्माण कार्य न हटाए जाने के कारण नगरपालिका ने दरगाह को ध्वस्त कर दिया ।
संपादकीय भूमिका
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