
बलि प्रतिपदा के दिन गोवर्धनपूजा करने की प्रथा है । भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन इंद्रपूजन के स्थान पर गोवर्धनपूजन आरंभ करवाया था । इसके स्मरणार्थ इस दिन गोवर्धन पूजन किया जाता है । प्रात:काल घर के मुख्य दरवाजे के सामने गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाया जाता है । फिर उसपर दूर्वा एवं पुष्प चढाते हैं ।
धर्मशास्त्र में कहा गया है कि गोवर्धन पर्वत का शिखर बनाएं । फूल-पत्तों और वृक्ष-लताओं से इसे सुशोभित करें । इसके समीप कृष्ण, इंद्र, गाय-बछडे के चित्र सजाकर उनकी भी पूजा करते हैं और चित्ररथ की शोभायात्रा निकाली जाती है; परंतु अनेक स्थानों पर झांकियां निकाली जाती हैं । चंदन, फूल इत्यादि से उसका पूजन कर प्रार्थना करते हैं ।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?