
‘हे प्रभु, हमारे ऋषि-मुनियों ने जिस उद्देश्य से त्योहार-उत्सवों का प्रयोजन किया है, उसका गर्भितार्थ हम समझ पाएं ! उस दृष्टिकोण से हम खरी दिवाली मना पाएं, ऐसी आपके श्रीचरणों में प्रार्थना है !’
‘हे प्रभु ! इस दीपावलीनिमित्त हमारा देहरूपी दीप, हमारे स्नेहवर्धक प्रेमभाव के तेल में ज्ञानरूपी बाती से प्रज्वलित हो । हमारी आत्मज्योति प्रज्वलित होने पर, अन्य दीप भी प्रज्वलित कर हम ज्ञानप्रकाश सर्वत्र फैला सकें । दीपावली आनंद से मनाने का सौभाग्य हमें मिले । इस सौभाग्य से ही हमारे राष्ट्र के लिए भी ‘भाग्यराष्ट्र’ के रूप में हमारा मस्तक गर्व से ऊंचा हो । आपसे विनती है प्रभु कि वह दिन अति शीघ्र आए भगवन !’
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
कोटि कोटि प्रणाम !
सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !
संपादकीय : गुरुभ्यो नमः ।
प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा अपने शिष्य डॉ. आठवलेजी के प्रति व्यक्त गौरवोद्गार !
इरोड (तमिलनाडु) में ‘महासुदर्शन याग’ एवं ‘आयुष्य होम’ भावपूर्ण वातावरण में संपन्न !