(और इनकी सुनिए…) ‘श्रीराममंदिर भारतीय लोकतंत्र पर कलंक !’ – पाकिस्तान
पाकिस्तान को भारत के लोकतंत्र की चिंता करने की अपेक्षा, स्वयं के देश के लोकतंत्र की पहले चिंता करनी चाहिए !
पाकिस्तान को भारत के लोकतंत्र की चिंता करने की अपेक्षा, स्वयं के देश के लोकतंत्र की पहले चिंता करनी चाहिए !
अधिकांश फलक अयोध्या के विविध प्रवेशद्वारों पर लगाए गए हैं ।
श्री रामलला जब तक मंदिर में स्थापित नहीं होंगे, तब तक अन्नग्रहण न करने का किया था निर्धार
मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाना, क्या उदयनिधि को यह सही लगता है ? उन्हें बताना चाहिए ! अगर उन्हें सही नहीं लगता है तो क्या वे देश के उन साढ़े तीन लाख मंदिरों को खाली करने के लिए कहेंगे जहां मस्जिदें बनायी गईं ?
‘मुस्लिमों का लाभ एवं हिन्दुओं के लिए कानून’ इस प्रकार धार्मिक पक्षपाती कानून तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने बनाए थे । केंद्र की मोदी सरकार को ये कानून रद्द करने चाहिए, ऐसी मांग इस समय की गई ।
इससे प्रभु श्रीराम हिन्दू समाज के अविभाज्य अंग हैं, यही ध्यान में आता है !
‘हमारे राजा श्रीराम का भव्य मंदिर बन रहा है । अब मात्र ८ दिन शेष हैं । बोलिए जय जय श्रीराम !’
मंदिर के माध्यम से रामतत्त्व कार्यरत होगा तथा उसके लिए आध्यात्मिक प्रेरणा मिलेगी । अतएव रामभक्त अब अपनी उपासना की गति बढाएं तथा राष्ट्रोत्थान के कार्य में अभूतपूर्व योगदान देने के लिए संगठित रूप से समर्पित हो जाएं, तो रामराज्य की प्रभात दूर नहीं !
श्रीराम के कार्यकाल में विधवा स्त्रियों का विलाप सुनाई नहीं देता था । किसी भी हिंस्र पशु का किसी को उपद्रव नहीं होता था, साथ ही समस्त जनता स्वस्थ थी । उस काल में चोरी, मारपीट, डाका जैसी घटनाएं नहीं होती थी ।
श्रीरामकी विविध गुण-विशेषताएं क्या हैं ?, रामायणके कुछ नामोंका भावार्थ, रामायणके अनेक प्रसंगोंका भावार्थ ये सब पढने के लिए अवश्य पढिये लघुग्रन्थ ‘श्रीराम’