(और इनकी सुनिए…) ‘श्रीराममंदिर भारतीय लोकतंत्र पर कलंक !’ – पाकिस्‍तान

पाकिस्‍तान को भारत के लोकतंत्र की चिंता करने की अपेक्षा, स्‍वयं के देश के लोकतंत्र की पहले चिंता करनी चाहिए !

अयोध्या में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा लगाए गए स्वागत फलक सभी का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं ! 

अधिकांश फलक अयोध्या के विविध प्रवेशद्वारों पर लगाए गए हैं ।

Jhameli Baba : बिहार के झमेली बाबा ३१ वर्षाें के उपरांत अन्नग्रहण करेंगे !

श्री रामलला जब तक मंदिर में स्थापित नहीं होंगे, तब तक अन्नग्रहण न करने का किया था निर्धार

Udhayanidhi Stalin : (और इनकी सुनिए….) ’मस्‍जिद गिराकर मंदिर बनाना स्‍वीकार नहीं है !’ – उदयनिधि स्‍टालिन

मंदिर तोड़कर मस्‍जिद बनाना, क्‍या उदयनिधि को यह सही लगता है ? उन्‍हें बताना चाहिए ! अगर उन्‍हें सही नहीं लगता है तो क्‍या वे देश के उन साढ़े तीन लाख मंदिरों को खाली करने के लिए कहेंगे जहां मस्‍जिदें बनायी गईं ?

श्रीराम की आलोचना करनेवालों पर कानूनन कठोर कार्रवाई के लिए ‘राम निंदा विरोधी कानून बनाएं ! – श्रीराम भक्‍तों की मांग

‘मुस्‍लिमों का लाभ एवं हिन्‍दुओं के लिए कानून’ इस प्रकार धार्मिक पक्षपाती कानून तत्‍कालीन कांग्रेस सरकार ने बनाए थे । केंद्र की मोदी सरकार को ये कानून रद्द करने चाहिए, ऐसी मांग इस समय की गई ।

Ram Popular Name : विश्‍व के ५७ लाख से अधिक लोगों का नाम ‘राम’, जबकि भारत में प्रत्‍येक २४५ वें  व्‍यक्‍ति का नाम ‘राम’ !

इससे प्रभु श्रीराम हिन्‍दू समाज के अविभाज्‍य अंग हैं, यही ध्‍यान में आता है !

Danish Kaneria : पाकिस्तान के क्रिकेट खिलाडी दानिश कनेरिया ने भी श्रीराममंदिर के विषय में प्रसारित की पोस्ट !

‘हमारे राजा श्रीराम का भव्य मंदिर बन रहा है । अब मात्र ८ दिन शेष हैं । बोलिए जय जय श्रीराम !’

रामराज्य की बेला…!

मंदिर के माध्यम से रामतत्त्व कार्यरत होगा तथा उसके लिए आध्यात्मिक प्रेरणा मिलेगी । अतएव रामभक्त अब अपनी उपासना की गति बढाएं तथा राष्ट्रोत्थान के कार्य में अभूतपूर्व योगदान देने के लिए संगठित रूप से समर्पित हो जाएं, तो रामराज्य की प्रभात दूर नहीं !

रामराज्य तथा उसकी प्रजा कैसी थी ? – श्री. दुर्गेश जयवंत परुळकर, हिन्दुत्वनिष्ठ व्याख्याता तथा लेखक, डोंबिवली, मुंबई

श्रीराम के कार्यकाल में विधवा स्त्रियों का विलाप सुनाई नहीं देता था । किसी भी हिंस्र पशु का किसी को उपद्रव नहीं होता था, साथ ही समस्त जनता स्वस्थ थी । उस काल में चोरी, मारपीट, डाका जैसी घटनाएं नहीं होती थी ।

देवताओंकी उपासना भक्तिभावसे करनेके लिए बतानेवाले सनातनके लघुग्रन्थ

श्रीरामकी विविध गुण-विशेषताएं क्या हैं ?, रामायणके कुछ नामोंका भावार्थ, रामायणके अनेक प्रसंगोंका भावार्थ ये सब पढने के लिए अवश्य पढिये लघुग्रन्थ ‘श्रीराम’