सर्वोच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत

नई देहली – राज्यसभा के पूर्व सांसद डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी एवं अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने संविधान की प्रस्तावना से ‘समाजवादी’ एवं ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द हटाने की मांग की है ।
१. डॉ. स्वामी ने याचिका में कहा है, ‘प्रस्तावना में संशोधन अथवा वह रद्द नहीं कर सकते । इस कारण उसमें किया गया एकमात्र संशोधन वापस लें । प्रस्तावना केवल संविधान की आवश्यक विशेषताएं नहीं हैं, अपितु एकीकृत समुदाय तैयार करने के लिए जो मूलभूत शर्तों का आधार लिया गया था, उसको भी प्रस्तुत करती है ।
२. अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा, ‘भारतीय संविधान की प्रस्तावना निश्चित दिनांक के साथ आती है । इस कारण बिना किसी चर्चा के उसमें संशोधन नहीं कर सकते । आपातकाल के समय में (वर्ष १९७५-७७) ४२वां संविधान संशोधन कानून सम्मत किया गया था ।

शैक्षणिक हेतु से परिवर्तन कर सकते हैं ! – न्यायालयसुनवाई के समय न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा, ‘शैक्षणिक हेतु के लिए संविधान की प्रस्तावना में दिनांक का उल्लेख किए बिना उसमें सुधार करने में आपत्ति नहीं हैं ।’ कदाचित् मैंने यह एकमात्र प्रस्तावना देखी है, जो एक दिनांक के साथ है । जब संविधान स्वीकार हुआ, तब मूल में ये दो शब्द (समाजवादी एवं धर्मनिरपेक्ष) उसमें नहीं थें । |
आपातकाल के समय अंतर्भूत किए गए थे दोनों शब्द !

वर्ष १९७६ में इंदिरा गांधी सरकार ने ४२वें संविधान संशोधन अंतर्गत ‘समाजवादी’ एवं ‘धर्मनिरपेक्ष’ ये शब्द संविधान की प्रस्तावना में समाविष्ट किए थे । इस संशोधन के कारण प्रस्तावना में भारत का वर्णन ‘सार्वभौम, लोकतंत्र, प्रजासत्ताक’ ऐसा होते हुए भी वह ‘सार्वभौम, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्र प्रजासत्ताक’ इस प्रकार परिवर्तित हुआ ।
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