


अयोध्या की भूमि रामलला का भव्य मंदिर देखने के लिए आतुर है । अनेक शिलाएं, ईंटें, सुंदर नक्काशी किए स्तंभ, ये सारी सामग्री राममंदिर के निर्माणकार्य में समर्पित होने को उत्सुक है । अयोध्या का कारसेवकपुरम्, श्रीराममंदिर निर्माण कार्य का स्थल है । वहां अनेक वर्षाें से प्रभु श्रीराम के आगमन की प्रतीक्षा करनेवाली शिलाओं को भक्तिभाव से स्पर्श करतीं श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी एवं श्रीचित्शक्ति् (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी ! यह अत्यंत प्रेममय स्पर्श, विगत अनेक वर्षाें से इस भूमि को मुक्त करने हेतु संघर्षरत रामभक्त, ‘राममंदिर अवश्य बनेगा’, इस श्रद्धा से शिला बनानेवाले आदि सभी के परिश्रम को किया अभिवादन ही है ! ये रामनामधारी शिलाएं ‘अयोध्या में राममंदिर बनाने के साथ साधकों के मन में आत्माराम की स्थापना हो, अखिल भारत भूमि राममय हो’, इस संकल्प की वाहक हैं । इस संकल्प की पूर्ति हेतु यह अयोध्या-यात्रा भगवान का बडा आशीर्वाद है !
श्रीराम मंदिर को सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी की नहीं, रामभक्त की आवश्यकता !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
कोटि कोटि प्रणाम !
सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !
संपादकीय : गुरुभ्यो नमः ।
प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा अपने शिष्य डॉ. आठवलेजी के प्रति व्यक्त गौरवोद्गार !