
‘श्रीराम के कार्यकाल में विधवा स्त्रियों का विलाप सुनाई नहीं देता था । किसी भी हिंस्र पशु का किसी को उपद्रव नहीं होता था, साथ ही समस्त जनता स्वस्थ थी । उस काल में चोरी, मारपीट, डाका जैसी घटनाएं नहीं होती थी । कोई भी व्यक्ति अनुचित मार्ग नहीं अपनाता था । समस्त प्रजा सदैव आनंद के साथ एवं प्रसन्नता से जीवन व्यतीत करती थी । श्रीराम के राज्य में जनता दीर्घायु थी । उनके जीवन में किसी भी प्रकार का दुख नहीं था । श्रीराम के कार्यकाल में प्रकृति का संतुलन बिगडे, ऐसा कोई भी कार्य किसी से भी नहीं होता था । समस्त प्रजा सभी नियमों का कठोरता से पालन करती थी । किसी के भी मन में कभी भी धोखाधडी करने की इच्छा उत्पन्न नहीं हुई ।’
– श्री. दुर्गेश जयवंत परुळकर, हिन्दुत्वनिष्ठ व्याख्याता तथा लेखक, डोंबिवली, मुंबई
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