
‘श्रीराम के कार्यकाल में विधवा स्त्रियों का विलाप सुनाई नहीं देता था । किसी भी हिंस्र पशु का किसी को उपद्रव नहीं होता था, साथ ही समस्त जनता स्वस्थ थी । उस काल में चोरी, मारपीट, डाका जैसी घटनाएं नहीं होती थी । कोई भी व्यक्ति अनुचित मार्ग नहीं अपनाता था । समस्त प्रजा सदैव आनंद के साथ एवं प्रसन्नता से जीवन व्यतीत करती थी । श्रीराम के राज्य में जनता दीर्घायु थी । उनके जीवन में किसी भी प्रकार का दुख नहीं था । श्रीराम के कार्यकाल में प्रकृति का संतुलन बिगडे, ऐसा कोई भी कार्य किसी से भी नहीं होता था । समस्त प्रजा सभी नियमों का कठोरता से पालन करती थी । किसी के भी मन में कभी भी धोखाधडी करने की इच्छा उत्पन्न नहीं हुई ।’
– श्री. दुर्गेश जयवंत परुळकर, हिन्दुत्वनिष्ठ व्याख्याता तथा लेखक, डोंबिवली, मुंबई
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?