
‘श्रीराम के कार्यकाल में विधवा स्त्रियों का विलाप सुनाई नहीं देता था । किसी भी हिंस्र पशु का किसी को उपद्रव नहीं होता था, साथ ही समस्त जनता स्वस्थ थी । उस काल में चोरी, मारपीट, डाका जैसी घटनाएं नहीं होती थी । कोई भी व्यक्ति अनुचित मार्ग नहीं अपनाता था । समस्त प्रजा सदैव आनंद के साथ एवं प्रसन्नता से जीवन व्यतीत करती थी । श्रीराम के राज्य में जनता दीर्घायु थी । उनके जीवन में किसी भी प्रकार का दुख नहीं था । श्रीराम के कार्यकाल में प्रकृति का संतुलन बिगडे, ऐसा कोई भी कार्य किसी से भी नहीं होता था । समस्त प्रजा सभी नियमों का कठोरता से पालन करती थी । किसी के भी मन में कभी भी धोखाधडी करने की इच्छा उत्पन्न नहीं हुई ।’
– श्री. दुर्गेश जयवंत परुळकर, हिन्दुत्वनिष्ठ व्याख्याता तथा लेखक, डोंबिवली, मुंबई
CM Dr. Mohan Yadav : प्रभु श्रीरामचंद्रजी ने एक विवाह किया, तो रहीम से भी वही अपेक्षा !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
कोटि कोटि प्रणाम !
सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !
संपादकीय : गुरुभ्यो नमः ।
प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा अपने शिष्य डॉ. आठवलेजी के प्रति व्यक्त गौरवोद्गार !