स्वार्थी मानव !

‘पृथ्वी पर सभी प्राणी दूसरों के लिए जीते हैं । पशु-पक्षी, वनस्पति अन्यों को कुछ न कुछ देते रहते हैं । मानव एकमात्र प्राणी है, जो केवल स्वयं के लिए जीता है । वह प्रकृति पशु-पक्षी एवं वनस्पति से निरंतर कुछ न कुछ लेता रहता है । मानव के स्वार्थ के कारण ही वह अन्य प्राणियों की तुलना में अधिक दुखी रहता है ।’
ईश्वरप्राप्ति के संदर्भ में मनुष्य की लज्जाजनक उदासीनता !
‘धनप्राप्ति, विवाह, रोग-व्याधि इत्यादि अनेक कारणों के लिए अनेक लोग उपाय पूछते हैं; परंतु ईश्वरप्राप्ति के लिए उपाय पूछने का कोई विचार भी नहीं करता !’
हिन्दुओं को साधना सिखाना अपरिहार्य !
‘संसार के सर्वश्रेष्ठ हिन्दू धर्म में जन्म प्राप्त करके भी धर्म के लिए कुछ भी न करनेवाले हिन्दू मरने योग्य हैं अथवा जीने योग्य नहीं’, ऐसा कुछ लोगों को लगता है; परंतु यह उचित नहीं ।’ उन्हें साधना सिखाना हिन्दुओं का कर्तव्य है ।’
– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?