स्वार्थी मानव !

‘पृथ्वी पर सभी प्राणी दूसरों के लिए जीते हैं । पशु-पक्षी, वनस्पति अन्यों को कुछ न कुछ देते रहते हैं । मानव एकमात्र प्राणी है, जो केवल स्वयं के लिए जीता है । वह प्रकृति पशु-पक्षी एवं वनस्पति से निरंतर कुछ न कुछ लेता रहता है । मानव के स्वार्थ के कारण ही वह अन्य प्राणियों की तुलना में अधिक दुखी रहता है ।’
ईश्वरप्राप्ति के संदर्भ में मनुष्य की लज्जाजनक उदासीनता !
‘धनप्राप्ति, विवाह, रोग-व्याधि इत्यादि अनेक कारणों के लिए अनेक लोग उपाय पूछते हैं; परंतु ईश्वरप्राप्ति के लिए उपाय पूछने का कोई विचार भी नहीं करता !’
हिन्दुओं को साधना सिखाना अपरिहार्य !
‘संसार के सर्वश्रेष्ठ हिन्दू धर्म में जन्म प्राप्त करके भी धर्म के लिए कुछ भी न करनेवाले हिन्दू मरने योग्य हैं अथवा जीने योग्य नहीं’, ऐसा कुछ लोगों को लगता है; परंतु यह उचित नहीं ।’ उन्हें साधना सिखाना हिन्दुओं का कर्तव्य है ।’
– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
मुंबापुरी में सहस्रों के समष्टि संकल्प से राष्ट्ररक्षा हेतु प्राप्त हुआ आध्यात्मिक बल !
Bangladesh Hindus : पिछले ४ महीनों में १०० हत्याएं, २८ बलात्कार एवं ९५ मंदिरों में तोडफोड
संपादकीय : राष्ट्र के लिए त्याग करें !
मथुरा (उत्तर प्रदेश) में रामराज्य की स्थापना हेतु की गई सामूहिक प्रार्थना !
नोएडा (उत्तर प्रदेश) के विद्यालय में ‘लव जिहाद’ विषय पर व्याख्यान