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(मौलाना अर्थात इस्लामी अध्ययनकर्ता)

नई देहली – केवल पर प्रमाणपत्र के नाम पर एक कागज का टुकडा दिए जाने से इस्लामी कानून के अनुसार किसी एक वस्तु को ‘हलाल’ (योग्य) अथवा ‘हराम’ (अयोग्य) कहा नहीं जा सकता । इस प्रकार का काम जो लोग और संस्थाएं कर रही हैं, वे अपराधी हैं । पहली बात उन्होंने इस्लामी कानून के विरोध में काम किया है । उन्होंने कागज का टुकडा देकर ‘यह वस्तु हलाल है’, ऐसा बताया है । दूसरी बात यह कि, यदि उन्होंने प्रमाणपत्र नहीं दिया होता, तो ग्राहक ने स्वयं जांच कर वस्तु ‘हलाल’ है@या ‘हराम’ है , यह ढूंढा होता; लेकिन प्रमाणपत्र देकर ऐसे लोगों को फंसाया जा रहा है, ऐसी टिप्पणी ‘ऑल इंडिया मुस्लिम जमात’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने हलाल प्रमाणपत्र देने वाली इस्लामी संस्थानों पर की । उत्तर प्रदेश सरकार ने हलाल उत्पादन और उन्हें दिए जाने वाले प्रमाणपत्र पर प्रतिबंध लगाया है । इसी पृष्ठभूमि पर मौलाना रिजवी बरेलवी बोल रहे थे ।
(सौजन्य : Uttar Pradesh Uttarakhand Daily)
मौलाना रिजवी बरेलवी द्वारा रखे सूत्र
१. जो संस्थाएं इस प्रकार के प्रमाणपत्र दे रही हैं, वे धर्म के नाम पर मुसलमान को धोखा दे रही हैं । यह ऐसा व्यवसाय है, जो अल्लाह के नाम से चालू होता है । विश्व में अल्लाह के नाम से चालू होने वाला दूसरा ऐसा कोई भी व्यवसाय नहीं ।
२. ‘हलाल’ प्रमाणीकरण केवल मांस का किया जा सकता है । यदि अन्य बातों पर हलाल की मोहर लगाई जा रही है, तो वह अच्छे शब्द का दुरुपयोग है । इस्लामी कानून के अनुसार हलाल केवल प्राणियों के मांस के लिए ही प्रयोग किया गया है । इसके अतिरिक्त अन्य वस्तुएं योग्य अथवा अयोग्य हो सकती हैं; लेकिन उन्हें हलाल की मोहर न लगाई जाए ।
३. कुछ संस्थाओं ने हलाल प्रमाणीकरण का व्यवसायीकरण करना चालू किया है । प्रत्येक बात को हलाल प्रमाणित करने के लिए प्रमाणपत्र देकर उसे आय का साधन बनाया है । उन्होंने इतनी हद की है कि सब्जी, फल, बिस्कुट आदि खाने-पीने की वस्तुएं भी हलाल प्रमाणित की हैं । मुसलमान संस्थाओं को ऐसी बातें करने से स्वयं को रोकना चाहिए ।
४. उत्तर प्रदेश सरकार को हलाल के संबंध में एक मंडल की स्थापना करनी चाहिए और ऐसे लोगों को दायित्व देना चाहिए जो इस्लामी कानून के अनुसार काम करने में सक्षम हैं ।
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