
‘छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप, स्वातंत्र्यवीर सावरकर और क्रांतिकारियों की आलोचना कर गांधीजी की अहिंसा की प्रशंसा करनेवाले हिन्दुओं की स्थिति दयनीय हो गई है । इससे निकलने का एक ही मार्ग है और वह है, हिन्दू राष्ट्र की स्थापना !’
हिन्दुओ, अपनी रक्षा के लिए तो भगवान की उपासना करो !
‘दंगे, युद्ध, प्राकृतिक आपदाएं इत्यादि संकटों के समय सरकार, पुलिस और सेना नहीं बचापाएगी । केवल ईश्वर ही बचा सकते हैं । इसके लिए तो साधना करो !’
रामराज्य के लिए अब हिन्दुओं का ही सक्रिय होना आवश्यक है !
‘हिन्दुओ, स्वतंत्रता से लेकर अभी तक के गत ७५ वर्षों में १-२ राजनीतिक दलों को छोडकर अन्य किसी भी राजनीतिक दल ने ‘हिन्दू राष्ट्र चाहिए’, ऐसा एक बार भी नहीं कहा, तो वे भला कृति क्या करेंगे ? हिन्दुओ, अब आप ही जागृत होकर रामराज्य के लिए सक्रिय हो जाएं !’
अधिवक्ताओं की ऐसी शिक्षा का क्या उपयोग ?
‘अपराधी को बचाने का प्रयास करनेवाले अधिवक्ता होते हैं, अर्थात उन्हें अधिवक्ता बनना सिखानेवाले महाविद्यालयों में नैतिकता का मूलभूत सिद्धांत नहीं सिखाया जाता । ऐसी शिक्षा का क्या उपयोग है ?’
स्वार्थी नेता और नि:स्वार्थी साधक !
‘साधक चुनावों में जीत जाएं, तब भी उनमें स्वार्थ न होने के कारण वे नेताओं की भांति भ्रष्टाचार कभी नहीं करेंगे !’
– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
सात्त्विकता एवं संगठन ही राष्ट्र के उत्कर्ष की चाबी – जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
Dhaka Hindu Protest : ढाका में हिन्दुओं ने निकाला विशाल मशाल जुलूस !
छोटे बच्चों को गोमांस देने का परामर्श का प्रकरण !
संपादकीय : नागरिक शास्त्र केवल पुस्तक में ?
केरल में दीपप्रज्वलन का विवाद : राष्ट्रीय व्यक्तित्व की आत्मा संस्कृति है या धर्म ?