
रामनाथी, १८ जून – वामपंथी शक्तियों ने भारत के शिक्षातंत्र को खोखला बना दिया है तथा उनमें देशविरोधी गतिविधियां चल रही हैं । अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले; इसके लिए हिन्दू अभिभावक बच्चों को बडे विश्वविद्यालयों में भेजते हैं; परंतु ये विश्वविद्यालय शिक्षा देने के स्थान पर प्रोपोगंडा बनाने के (राजनीतिक दुष्प्रचार एवं अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन करनेवाले) केंद्र बन चुके हैं । शिक्षा का संस्कारों के साथ के संबंध को वामपंथियों ने कभी का तोड दिया है । विश्वविद्यालयों में भावी पीढी को राष्ट्रविरोधी बनाने का काम चल रहा है । इसे रोकने के लिए हमें शिक्षा एवं संस्कार दिलानेवाली गुरुकुल शिक्षाव्यवस्था का समर्थन करना होगा । वामपंथी स्वयं को मानवतावादी एवं पर्यावरणवादी दिखाने का प्रयास करते हैं । विश्व में वामपंथियों का सत्ता में आने का इतिहास रक्तरंजित है । उसके कारण हिन्दुओं को ‘ब्रेकिंग इंडिया फोर्सेस’ के षड्यंत्र की ओर गंभीरता से देखने की आवश्यकता है, अन्यथा भविष्य में भारतविरोधी गतिविधियां चलाने के लिए बाहर से आक्रमण करने की आवश्यकता ही नहीं रहेगी । इस षड्यंत्र को रोकने के लिए इसे गंभीरता के साथ लेना पडेगा । इसके लिए विश्वविद्यालयों में राष्ट्रहित की तथा भारतीय संस्कृति की शिक्षा देनी पडेगी तथा इसके लिए हिन्दू राष्ट्र की आवश्यकता है । श्री. रमेश शिंदे ने ऐसा स्पष्टतापूर्ण प्रतिपादन किया । वैश्विक हिन्दू राष्ट्र महोत्सव के तीसरे दिन (१८.६.२०२३ को) उपस्थित हिन्दुत्वनिष्ठों को संबोधित करते हुए वे ऐसा बोल रहे थे ।
इस अवसर पर व्यासपीठ पर प्रज्ञा मठ पब्लिकेशन के लेखक तथा प्रकाशक मेजर सरस त्रिपाठी, कर्नाटक उच्च न्यायालय के अधिवक्ता अमृतेश एन्.पी. तथा मुंबई के उच्च न्यायालय में कार्यतर अधिवक्ता श्रीमती सिद्ध विद्या उपस्थित थीं ।
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