वाराणसी में हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों का ‘हिन्दू राष्ट्र जागृति आंदोलन’
धार्मिक भेदभाव करनेवाले हलाल प्रमाणपत्र पर प्रतिबंध लगाया जाए

वाराणसी (उत्तर प्रदेश) – ३ मार्च से ‘जी-५ (ZEE 5)’ ओटीटी प्लेटफॉर्म से प्रसारित हुई है ! ‘ताज : डिवाइडेड बाय ब्लड’ वेबसीरीज द्वारा हिन्दुओं पर अत्याचार करनेवाले क्रूर अकबर एवं उसके परिवार का, अर्थात मुगलों का महिमामंडन किया जा रहा है । इसलिए इस वेबसीरीज पर प्रतिबंध लगाएं, इसके साथ ही हिन्दू-मुसलमानों में धार्मिक भेदभाव करनेवाले हलाल प्रमाणपत्र पर प्रतिबंध लगाया जाए । इन मांगों के लिए यहां के शास्त्री घाट पर ‘हिन्दू राष्ट्र-जागृति आंदोलन’ किया गया । इस आंदोलन में सर्वश्री वाराणसी व्यापार मंडल अध्यक्ष अजीत सिंह बग्गा, महामंत्री कविंद्र जयस्वाल, मंत्री संजय केसरी, माध्यम प्रभारी डॉ. रमेश दत्त पांडे, आदिमहादेव काशी धर्मालय मुक्ति न्यास के प्रबंध ट्रस्टी डॉ. रामप्रसाद सिंह, केंद्रीय ब्राह्मण महासभा के मनीष कुमार शर्मा, पांडेयपुर व्यापार मंडल के गोपाल दास गुप्ता, हिंदुस्तान समाचार के संजय शुक्ला, ऑटो यूनियन के अध्यक्ष ईश्वर सिंह, हिन्दू समाज पार्टी के शुभम पांडे, महावीर सेना के अरविंद गुप्ता, हनुमान चालीसा मंडल के सुमित सराफ, हिन्दू जनजागृति समिति के राजन केशरी एवं अन्य धर्माभिमानी उपस्थित थे ।
१. देहली पर राज्य करनेवाले हिन्दू राजा विक्रमादित्य हेमू के युद्ध में अचेत हो जाने पर १४ वर्ष के अकबर ने उनका शिरच्छेद किया । जिस अकबर ने सहस्रों हिन्दुओं का शिरच्छेद कर उन मस्तकों की मीनार खडी की; जिसके शासनकाल में सैकडों मंदिर उद्ध्वस्त किए गए; हिन्दुओं का धर्मांतर किया गया; हिन्दू स्त्रियों पर अत्याचार कर उनकी बिक्री की गई, ऐसे मुगलों का महिमामंडन करनेवाली वेबसीरीज, हिन्दुओं के घावों पर नमक छिडक रही है !
२. वेबसीरीज में अकबर की भूमिका साकारनेवाले अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने मुगलों की प्रशंसा कर, उसकी क्रूरता की अनदेखा कर धार्मिक तनाव निर्माण करने का प्रयत्न किया । इससे पूर्व भी उन्होंने हिन्दुओं को उकसानेवाले वक्तव्य करते हुए हिन्दू-मुसलमानों में जातीय तनाव निर्माण किया था । इसलिए शाह जैसे मुगलप्रेमी कलाकारों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए, ऐसी मांग भी इस आंदोलन में की गई है ।
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