
कांचीपुरम (तमिलनाडू) – मंदिरों को मिलने वाला राजस्व सरकारी और प्रशासनिक व्यय (खर्च) में न प्रयोग कर केवल मंदिर की देखभाल और हिन्दू हित के लिए प्रयोग किया जाना चाहिए, विश्व हिन्दू परिषद के कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने ऐसी मांग की । यहां आयोजित विहिप की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक के अवसर पर पत्रकारों से बात करते समय उन्होंने ऐसा कहा । ‘संबंधित राज्य सरकारों के अधिकार से मंदिरों को मुक्त करने और उनका व्यवस्थापन हिन्दू समाज को सौंपने के लिए विहिप अधिक तीव्र आंदोलन करेगी’, आलोक कुमार ने ऐसा मत व्यक्त किया ।
उन्होंने आगे कहा, ‘कुछ मंदिरों का व्यवस्थापन संबंधित राज्य सरकारें देख रही हैं, यह दु:ख की बात है । तमिलनाडू के मंदिरों में हुई देवताओं की मूर्तियों की तोडफोड की घटना गलत है । पुलिस का यह दावा कि नशे में धुत व्यक्तियों ने यह तोडफोड की, गलत है । इसके पीछे सुनियोजित षड्यंत्र है । तमिलनाडू सरकार को दोषी व्यक्तियों पर कार्यवाही करनी चाहिए ।’
विश्व हिंदू परिषद की केंद्रीय प्रबंध समिति की कांचीपुरम में चल रही दो विदवीय बैठक के उद्घाटन सत्र के बाद केंद्रीय कार्याध्यक्ष श्री आलोक कुमार द्वारा जारी प्रेस वक्तव्य :
काशी और मथुरा पर अपने दावों को लेकर हिंदू दृढ़प्रतिज्ञ हैं: @AlokKumarLIVE pic.twitter.com/xHVjYWQuE9
— Vishva Hindu Parishad -VHP (@VHPDigital) June 25, 2022
विश्स हिन्दू परिषद काशी के मंदिर और मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर अधिकार मांगेगी !
आलोक कुमार ने कहा कि विश्व हिन्दू परिषद कानून की सीमा में रहकर शांतिपूर्ण मार्ग से काशी विश्वनाथ मंदिर और मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मूल स्थान पर पुन: अधिकार मांगेगी । संवैधानिक मार्ग से हम यह प्रयास चालू रखेंगे । प्रकरण न्यायालय में होने से दोनों पक्षों के लिए न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा करना सही होगा ।
भारत की शासन व्यवस्था शरीयत कानून के अनुसार नहीं, अपितु संविधान द्वारा चलती है !
आलोक कुमार ने कहा कि नूपुर शर्मा और नवीन जिंदाल के वक्तव्यों के विरुद्ध हुई हिंसा में देश के अनेक स्थानों पर सार्वजनिक संपत्ति और सरकारी संस्था की हानि हुई है, साथ ही पुलिस पर आक्रमण हुए, हम इसका विरोध करते हैं । शत्रु देश और कुछ देशद्रोही समूहों के अनुचित प्रचार के कारण कट्टरपंथियों ने शर्मा और जिंदाल का सिर काटने, हिन्दुओं की संपत्ति को हानि पहुंचाने और मार्ग पर हिंसा करने की धमकियां दीं । विश्व हिन्दू परिषद ऐसे घृणास्पद कृत्यों का निषेध करती है । भारत की शासन व्यवस्था शरीयत कानून के अनुसार नहीं, अपितु संविधान द्वारा चलती है । किसी को भी किसी को दोषी सिद्ध करने का अधिकार नहीं ।
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