‘अग्नि’मय पथ !
भारत में बारंबार बेरोजगारी का सूत्र उपस्थित किया जाता है । इसके लिए सत्ताधारी पक्ष को घेरने की राजकीय परंपरा हमारे यहां कुछ नई नहीं । भाजपा एवं अन्य तत्कालीन विरोधी पक्ष ने वही किया और आज कांग्रेस एवं अन्य विरोधी पक्ष भी वही कर रहे हैं । अर्थात केंद्रशासन द्वारा जो-जो अच्छा करने का प्रयत्न किया जाता है, उसका श्रेय सत्ताधारी पक्ष को न मिले इसलिए समाजद्रोही राजनीति की जाती है । वर्तमान में तो ‘हिन्दुत्वनिष्ठ विचारधारा के मोदी शासन केंद्र में होते हुए इस राजनीति में मानो उफान आ गया हो’, ऐसा कहने में कुछ गलत नहीं । इसमें मूल विषय एक ओर रह जाता है और उसका अलग ही स्वरूप प्राप्त होताहै । इस माध्यम से समाज के बडे वर्ग की दिशाभूल भी होती है । अनेक दशकों से अटकी हुई ‘वन रैंक वन पेंशन’ इस सेना के निवृत्त अधिकारियों के लिए महत्त्वपूर्ण योजना की प्रत्यक्ष कार्यवाही करनेवाली भाजपा सरकार को अनेक राजकीय पक्षों ने जोरदार विरोध किया था, वह इसीलिए !
संरक्षणात्मक आवाहन !
आज का विषय भी सेना से संबंधित है । संरक्षण मंत्रालय ने युवकों के लिए ‘अग्निपथ’ नामक सेना भर्ती की योजना बनाई थी । इसके अंतर्गत साढे सत्रह से १ वर्ष इस आयुवर्ग के युवक सेना में भरती हो पाएंगे । उन्हें ‘अग्निवीर’ नाम से संबोधित किया जाएगा । उनमें से ७५ प्रतिशत युवकों को ४ वर्षाें उपरांत निकाल दिया जाएगा । इन ७५ प्रतिशत युवकों को बाद में १० से १२ लाख रुपये दिए जाएंगे; परंतु निवृत्तिवेतन की सुविधा नहीं होगी । इस योजना के कारण युवकों में एक प्रकार का अनुशासन निर्माण होगा, ऐसा अनेकों का कहना है । ‘भारत में बेरोजगारी की मात्रा वर्ष २०१४ के पहले के वर्षाे की तुलना में गत ८ वर्षाें में अधिक मात्रा में वृद्धि हुई है ।’, ऐसे आरोप कांग्रेसी समूह से बार-बार लगाए जाते हैं । इसमें कितना तथ्य है ? यह शोध का विषय; परंतु ‘अग्निपथ’ के माध्यम से युवकों को निश्चित रूप से रोजगार उपलब्ध होनेवाला है । इस योजना के लाभ हैं, तब भी उस पर प्रश्नचिन्ह भी उपस्थित किए जा रहे हैं ।
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) ए.के. सिवाच का कहना है कि शासन द्वारा यह योजना सभी के लिए सार्वजनिक करने के पहले प्रायोगिक स्तर पर अंतर्गत प्रकल्प (पायलट प्रोजेक्ट) कार्यान्वित कर उसके लाभ एवं हानि का अध्ययन करना आवश्यक था । मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. जी.डी. बक्षी ने इस संदर्भ में महत्त्वपूर्ण निरीक्षण किए हैं । विविध ट्वीट्स करते हुए वे बोले कि चीन एवं पाक द्वारा देश को खतरा होते हुए सेना भर्ती में आमूलाग्र परिवर्तन करना आत्मघात है । अग्निपथ योजना के माध्यम से सरकार का पैसा भले ही बचेगा, तब भी उससे सेना में अस्थिरता निर्माण हो सकती है । बक्षी ने आगे कहा, ‘‘४ वर्ष सेना में सेवा देने के पश्चात यही युवक निवृत्त होने पर आतंकवादी संगठनों में भर्ती होने की संभावना भी बहुत है । इस अवसर पर उन्होंने ‘कुल देशांतर्गत उत्पादनों में से (‘जीडीपी’ का) ३ प्रतिशत भाग सेना पर खर्च करने के लिए उपयोग में लाया जाना चाहिए’, ऐसी मांग भी की । बक्षी द्वारा उपस्थित किया गया प्रश्न अध्ययनपूर्ण एवं वस्तुनिष्ठ है । उस पर यदि केंद्र अध्ययन न करे अथवा यह योजना एकांगी है, ऐसा कहना नहीं है; परंतु इन समस्याओं पर योग्य उपाय निकालना देश की अखंडता बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है । इन सेवानिवृत्त वरिष्ठ सेनाधिकारियों को चिंतित करनेवाली गंभीर एवं संभाव्य समस्याओं पर संरक्षण मंत्रालय को स्पष्टीकरण देना भी आवश्यक है ।
ऐसे ‘अग्निवीर’ कदापि नहीं !
दूसरी ओर अग्निपथ योजना का युवकों द्वारा भारी मात्रा में विरोध किया जा रहा है । १६ जून को बिहार के जहानाबाद, नवादा, बक्सर, भभुआ, आरा, मुंगेर, सहरसा, गया, सिवान आदि अनेक स्थानों पर युवकों ने एकत्र आकर हिंसाचार किया । कुछ स्थानों पर आगजनी, तो कुछ स्थानों पर बसों की तोड-फोड की गई । नवादा में भाजपा के कार्यालय को, तो छपरा में एक रेलगाडी के डिब्बे को आग लगाई गई । हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में भी इस योजना के प्रति रोष ध्यान में आया । इतने स्थानों पर एक ही दिन और एक ही समय पर विरोध प्रदर्शन होना, कोई सामान्य बात नहीं । इसके पीछे कौन है ? यह देखना होगा; परंतु प्रदर्शनकारी युवकों द्वारा दर्शाए गए विरोध की पद्धति भी निश्चित ही निषेधजनक है । मतभेद होना स्वाभाविक है । उसका विरोध करना, यह प्रत्येक नागरिक को लोकतंत्र द्वारा प्रदान किया गया मूलभूत अधिकार है; परंतु विरोध करने की कुछ पद्धति है । हमारे यहां ‘हिंसा करने पर ही सरकार उसकी ओर ध्यान देती है’, ऐसी गलत रीति बन गई है । आज कानून-सुव्यवस्था हाथ में लेनेवालों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जा रही है । उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ शासन दंगाई मुसलमानों के विरुद्ध कार्यवाही करते हुए उनके अवैध घरे ‘बुलडोजर’ से गिरा रहा है । ऐसे समय पर इन युवकों पर भी कार्यवाही होनी ही चाहिए । प्रदर्शनकारी युवकों का कहना है कि ४ वर्ष उपरांत निवृत्त किए गए ७५ प्रतिशत बच्चों का भविष्य क्या होगा ? इस विषय में उनमें अनभिज्ञता है । भाजपाशासित राज्यों ने इस पर स्पष्टीकरण दिया है कि ऐसे युवकों को सरकारी नौकरियों में प्रधानता दी जाएगी । योगी आदित्यनाथ ने कहा है, ‘युवक बहकावे में न आएं ! उत्तर प्रदेश शासन ‘अग्निवीरों’ को पुलिस और अन्य विभागों में वरिष्ठ पद देगा ।’ केंद्र एवं अन्य राज्यों को भी इस पर युवकों को आश्वस्त करना आवश्यक है । ऐसा होने पर भी हिंसाचार करनेवाले युवकों पर अपराध प्रविष्ट कर उन्हें ‘अग्निवीर’ बनने से रोकना चाहिए । जो युवक स्वार्थ के लिए देश की संपत्ति की हानि करता है, वह ‘अग्निवीर’ बनकर कौनसा देशहित साध्य करेगा ? उसके लिए उनकी पात्रता है क्या ? इसके विपरीत मेजर जनरल बक्षी द्वारा व्यक्त की आशंका के अनुसार यही प्रदर्शनकारी; परंतु ‘प्रशिक्षित’ अग्निवीर ४ वर्ष उपरांत आतंकवादी अथवा देशविघातक संगठनों में सम्मिलित नहीं होेंगे, इसकी निश्चिति कौन देगा ? ‘अग्निवीर’ देश के वीरपुत्र होने चाहिए, जो नीच स्वार्थ के लिए नहीं, अपितु देश की एकता एवं अखंडता के लिए संघर्ष करेंगे !

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