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उडुपी (कर्नाटक) – शांति और सद्भाव महत्वपूर्ण हैं ; किंतु, इसे केवल एक समुदाय द्वारा बनाए नहीं रखा जा सकता । हिन्दू समाज पहले ही बहुत कुछ सहन कर रहा है । कुछ घटनाओं के कारण, हिन्दुओं को अप्रतिम हानि हुई है । इस समस्या को कुछ धर्मगुरुओं के साथ चर्चा करके हल नहीं किया जा सकता है । जड से इसका समाधान ढूंढना होगा । कर्नाटक के पेजावर मठ के विश्व प्रसन्नन तीर्थ स्वामी जी ने उनसे मिलने आए मुसलमान व्यापारियों के एक प्रतिनिधि मंडल से कहा कि, “जब वर्षों तक किसी समाज पर अन्याय होता है, तो कभी न कभी उसका उद्रेक होता ही है ।” कर्नाटक में कुछ मंदिरों ने मुसलमान दुकानदारों को अपने वार्षिक उत्सव के समय मंदिर परिसर में दुकान स्थापित करने की अनुमति देने से नकार कर दिया है । इस संबंध में, कुछ मुसलमान और ईसाई व्यापारियों के साथ-साथ धार्मिक नेताओं और व्यापारियों के एक प्रतिनिधि मंडल ने विश्व प्रसन्नन तीर्थ स्वामी जी से भेंट की और उन्हें प्रकरण में हस्तक्षेप करने के लिए कहा । तब स्वामी जी ने उपरोक्त कथन किया । प्रतिनिधि मंडल ने कहा कि, “व्यापारी धार्मिक त्योहारों के समय साहित्य बिक्री कर अपना जीवन यापन करते हैं । उन्हें अब समस्या का सामना करना पडेगा । इसलिए, मंदिर क्षेत्र में व्यापार की अनुमति दी जानी चाहिए ।”
केवल शांति और सद्भाव की चर्चा ही पर्याप्त नहीं है !
स्वामीजी ने आगे कहा कि, “एक विधवा की सारी गायें चोरी कर ली गईं ; फलस्वरूप, उसके पास आजीविका का कोई स्रोत नहीं था । इसलिए, उसे सडक पर आना पडा । ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जो हिन्दुओं के लिए अत्यंत दुखद हैं । हमने भी ऐसी दुखद घटनाओं को झेला है । यदि कोई शांति और सद्भाव की चर्चा करता है, तो वह पर्याप्त नहीं है । उसी प्रकार, शांतिपूर्ण और सामंजस्यपूर्ण जीवन यापन करने के लिए, किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं है ।”
(कहते हैं) ‘१-२ लोगों के कारण, संपूर्ण समाज से द्वेष नहीं किया जा सकता !’ – अबुबक्कर अत्रादी, उडुपी उपभोक्ता मंच के मानद अध्यक्ष
उडुपी कंज्यूमर फोरम के मानद अध्यक्ष अबुबक्कर अत्रादी ने कहा, “यदि समाज में १-२ लोग बुरे काम कर रहे हैं, तो वह समाज आगे आकर उनका खुलकर विरोध करे और समझाए कि वे कैसे निंदनीय हैं । जिहादी आतंकवाद आज पूरे विश्व में चल रहा है ।” दूसरी ओर, भारत में जब जिहादी आतंकवादी मारे जाते हैं और बंदी बनाए जाते हैं, तो वे यह कहने का प्रयत्न करते हैं कि, वे कितने निरपराधी हैं । अबुबक्कर इस संबंध में बात क्यों नहीं करते ? “हम एक ही माता की संतान हैं । मेरा आग्रह है कि, प्रत्येक आपस में मिलजुल कर रहें ।” (ताली कभी एक हाथ से नहीं बजती ! हिन्दू सदा मिलजुल कर रहते आए हैं, किन्तु अन्य धर्मावलंबियों ने सदा हिन्दुऒं पर अत्याचार किए हैं । क्या अबुबक्कर को यह सब दिखाई नहीं देता ? – संपादक)
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