याचिका के माध्यम से केंद्र सरकार को, पुत्र की मुक्ति के लिए प्रयास करने का आदेश देने की मांग !
यह एक अक्षम्य अपराध होगा, यदि भारत सरकार ने गत २५ वर्षों से पाकिस्तान में बंदी बनाए गए भारतीय सेना के एक अधिकारी को मुक्त कराने का कोई प्रयास नहीं किया । इसके लिए, उस समय से अब तक शासन करने वाले सभी दलों के लोग उत्तरदायी हैं । ये लोग कितना भी प्रायश्चित करें, वह कम ही होगा ! – संपादक

नई देहली : पाकिस्तान के कारागृह में गत २५ वर्षों से बंद, सैन्य अधिकारी की मुक्ति के लिए उनकी मां ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका प्रविष्ट की है । याचिका में मांग की गई है कि, माननीय न्यायालय केंद्र सरकार को, पुत्र की पाकिस्तानी कारागृह से मुक्ति सुनिश्चित करने के लिए, राजनीतिक स्तर पर प्रयास करने का निर्देश दे । याचिका पर उच्चतम न्यायालय सुनवाई करेगा । प्रकरण की सुनवाई अप्रैल के पहले सप्ताह में होगी । याचिका ८२ वर्षीय माला भट्टाचार्जी ने प्रविष्ट की है । उनके पुत्र, कैप्टन संजीत भट्टाचार्जी, पाकिस्तान के लाहौर के कारागार में बंद हैं । कैप्टन संजीत भट्टाचार्जी को पाकिस्तानी सेना ने अप्रैल १९९७ में, गुजरात की कच्छ सीमा पर रात्रि गश्त के समय बंदी बना लिया था ।
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