
नमक के जल से स्नान करने से शरीर की काली शक्ति अधिक मात्रामें नष्ट होना : ‘नमक के जल से स्नान करने से संपूर्ण शरीर के १०६ देहशुद्धिकारी चक्रों पर स्थित कष्टदायक शक्तियों का संग्रह नष्ट होता है । फलस्वरूप देहशुद्धिकारी चक्र २ – ३ प्रतिशत जागृत होते हैं एवं कष्टदायक शक्ति शरीर से बाहर निकलती है । साथ ही, नमक के जल को आपतत्त्व की १०० प्रतिशत सहायता मिलने से शरीर में कष्टदायक शक्ति के संग्रह अधिक मात्रा में नष्ट होते हैं ।’
– श्री गुरुतत्त्व (श्री. निषाद देशमुख के माध्यम से, १६.४.२००६, रात्रि ९.३३)
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
कोटि कोटि प्रणाम !
सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !
संपादकीय : गुरुभ्यो नमः ।
प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा अपने शिष्य डॉ. आठवलेजी के प्रति व्यक्त गौरवोद्गार !
इरोड (तमिलनाडु) में ‘महासुदर्शन याग’ एवं ‘आयुष्य होम’ भावपूर्ण वातावरण में संपन्न !