
नई दिल्ली – ‘लज्जा’,यह कादंबरी मैंने बांगलादेश में धार्मिक हिंसा के विरोध में लिखी थी । २८ वर्ष पूर्व बांगलादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री खालिदा जिया ने उसपर प्रतिबंध लगाया । यदि अभी की प्रधानमंत्री शेख हसीना धार्मिक हिंसा के विरोध में है, तो उन्होंने पुस्तक पर लगा प्रतिबंध क्यों नहीं हटाया, ऐसा प्रश्न इस कादंबरी की लेखिका तस्लिमा नसरीन ने ट्वीट कर पूछा है । बांगलादेश में कुरान के कथित अपमान पर धर्मांधों द्वारा हिन्दुओं पर किए आक्रमणोें के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना ने ‘आरोपियों पर कठोर कार्यवाही की जाएगी’, ऐसा कहा है । इस पृष्ठभूमि पर नसरीन ने यह ट्वीट किया है । ‘लज्जा’, इस कादंबरी में धर्मांधों की ओर से हिन्दुओें पर किए गए अत्याचारों को बताया है । इस कारण धर्मांधों ने दबाव बनाकर उस पर बांगलादेश में प्रतिबंधित करने को विवश कर दिया, साथ ही तस्लीमा नसरीन को जान से मारने का प्रयास किया । इस कारण नसरीन को बांगलादेश से पलायन करना पडा । वे पिछले २८ वर्षों से आज भी विस्थापित के समान भारत और अन्य देशों में रह रही हैं ।
'Lajja' is still relevant. pic.twitter.com/GCl9IbWrOj
— taslima nasreen (@taslimanasreen) October 18, 2021
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