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धनबाद (झारखंड) – ‘हिन्दू धर्म में ‘पितृऋण’ से मुक्त होने के लिए श्राद्धविधि करने का विशेष महत्त्व बताया गया है; परंतु समाज को श्राद्ध करने का महत्त्व और उस विषय के धर्मशास्त्र का ज्ञान न होने से श्राद्ध के विषय में अनेक भ्रांतियां फैली हुई हैं । ऐसे में श्राद्ध करने का शास्त्र समझकर कृति करने से हमें अधिक लाभ होता है’, ऐसा मार्गदर्शन हिन्दू जनजागृति समिति के पूर्व और पूर्वोत्तर भारत समन्वयक श्री. शंभू गवारे ने किया । इस कार्यक्रम का लाभ धनबाद और रांची के जिज्ञासुओं ने लिया । पितृपक्ष के निमित्त यहां की लोहाना महिला मंडल और गुजराती महिला मंडल द्वारा एक ‘ऑनलाइन’ प्रवचन का आयोजन किया गया था । इस समय मार्गदर्शन करते हुए श्री. गवारे ने ‘पितृपक्ष में श्राद्ध किसे करना चाहिए ? वर्तमान कोरोना महामारी के काल में श्राद्ध कैसे करें ? पितृदोष दूर करने के क्या उपाय हैं ?’, ऐसे अनेक प्रश्नों के उत्तर दिए । इस प्रवचन के आयोजन हेतु लोहाना समाज की अध्यक्षा श्रीमती गीता दलाल का विशेष योगदान प्राप्त हुआ ।
देहली एवं एनसीआर में प्रवचन
देहली – पितृपक्ष के उपलक्ष्य में देहली व एनसीआर में ऑनलाइन प्रवचन का आयोजन किया गया । प्रवचन में उपस्थित लोगों को ‘श्राद्ध का महत्त्व’, ‘दत्त भगवान के नामजप का क्या महत्त्व है ?’, इस विषय में देहली की साधिका पूर्णिमा शर्मा ने सभी का मार्गदर्शन किया । इस समय सभी ने भगवान दत्तात्रेय का नामजप किया । उपस्थित भक्तजनों को नामजप करते समय, मन निर्विचार होना, मन एकाग्र होना इस प्रकार की अनुभूति हुई । इस प्रवचन का सूत्रसंचालन मथुरा की साधिका कु. अक्षिता वार्ष्णेय ने किया ।
फरीदाबाद (हरियाणा) में प्रवचन
फरीदाबाद (हरियाणा) – पितृपक्ष में श्राद्ध क्यों करना चाहिए, उससे क्या लाभ होता है ? आदि विषयों पर उपस्थित जनों को हिन्दू जनजागृति समिति की श्रीमती संदीप मुंजाल ने ऑनलाइन प्रवचन में मार्गदर्शन किया । इस प्रवचन का सूत्रसंचालन श्रीमती रिद्धि अग्रवाल ने किया । इस समय सभी ने भगवान दत्तात्रेय का नामजप किया ।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?