
प्रसंग १ : आवारा गुंडे ने हाथ पकड लिया, तो उसका प्रतिकार कैसे करें ?
१. गुंडे से २ – ३ फीट की दूरी बनाए रखकर जब वह सतर्क नहीं होता, तब उसके जननेंद्रिय पर ‘कमरमार’ (पैर के तलवे से सामनेवाले व्यक्ति की जननेंद्रिय पर जोर से मारना) करें ।
२. इस प्रहार के कारण होनेवाली पीडा के कारण वह गुंडा आपका हाथ छोडकर कमर से नीचे झुकेगा, तब बाएं हाथ से उसके केश पकडकर उसका सिर भूमि की दिशा में नीचे दबाएं और अपनी दाहिनी कोहनी से उसकी रीढ की हड्डी पर जोर से आघात करें, साथ ही घुटने से उसके चेहरे पर आघात करें ।
प्रसंग २ : किसी ने पीछे से आकर धक्का मारा, तो उसे कैसे पाठ पढाना चाहिए ?
१. धक्का मारकर आगे जा रहे व्यक्ति के शर्ट की कॉलर को जोर से पकडकर उसे जोर से पीछे खींचे ।
२. उसी समय अपना बायां पैर उसके पैरों के पीछे आडा लगाकर उसे झुकाएं । जब वह व्यक्ति झुके, अपनी दाहिने हाथ की कोहनी से उसके मुंह पर जोरदार आघात करें ।
३. इस आघात से वह भूमि पर चित गिरेगा । उस समय उसकी छाती और पेट के मध्य में स्थित मर्मस्थल पर दाहिनी मुट्ठी से जोरदार प्रहार करें ।
प्रसंग ३ : चाकू से वार करने का प्रयास करने पर क्या करना चाहिए ?
१. कोई चाकू लेकर मारने आया, तो उसने जिस हाथ में चाकू पकडा है, उस हाथ को तत्परता से पकडकर उसे मरोड दें ।
२. उसके मरोडे हुए हाथ को पकडकर स्वयं बाईं बाजू से वृत्ताकार घूमें और उसके उसके हाथ की कोहनी को उल्टा कर उसे भूमि की दिशा में दबाएं और उसके हाथ की हड्डी तोड दें ।
दुर्बल व्यक्ति की सर्वत्र निंदा की जाती है, इसे ध्यान में लेकर स्वयं के शरीर और मन को प्रतिकारक्षम बनाएं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
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