देश की राजधानी जिस जिले में है, वहां के गांवों के नाम इस्लामी आक्रांताओं के नाम पर होना, यह स्वतंत्रता के बाद अभीतक के सभी पार्टियों के शासनकर्ताओं के लिए लज्जास्पद ! इस्लामी आक्रांताओं के नाम पर गांव, शहर तथा मार्ग होना, यह गुलामी का प्रतीक है । इसे हटाने के लिए केंद्र सरकार को तत्परता से कदम उठाना चाहिए, ऐसा ही राष्ट्रप्रेमियों को लगता है ! – संपादक

दिल्ली – जिले में हुमायूं, तैमूर, औरंगजेब या मोहम्मद गोरी ऐसे आक्रांताओं के नाम वाले गांवों के वास्तविक नाम अलग हैं ,जो सामने आए हैं । इस संबंध में ऐतिहासिक दस्तावेजों में साक्ष्य के आधार पर ज्ञात हुआ है कि इन गांवोें के वास्तविक नाम हिन्दुओं के देवताओं के या महापुरूषों के नाम पर हैं ।
दिल्ली के 365 गाँवों के नाम आक्रांताओं पर, पहले हिन्दू देवी-देवताओं पर थे: ऐतिहासिक साक्ष्य पर नाम वापसी प्रक्रिया शुरू#Delhi https://t.co/ZJlEpSfwfA
— ऑपइंडिया (@OpIndia_in) September 5, 2021
१. वर्तमान में ‘मोहम्मदपुर’ गांव का नाम बदलने की चर्चा चल रही है । इस गांव का प्राचीन नाम ‘माधवपुर’ था । इतिहासकार मनीष कुमार गुप्ता ने बताया कि, पृथ्वीराज चौहान को परास्त करने के बाद मोहम्मद गोरी ने उत्तर भारत की सत्ता उसके गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक को सौंपी और वह वापस निकल गया । इसके बाद गोरी की इच्छा के अनुसार कुतुबुद्दीन ऐबक ने भारत मेंं इस्लाम का प्रचार करने के लिए वहां के स्थानों के नाम बदलने शुरू किए । इस अनुसार ‘माधवपुर’ गांव का नाम बदलकर अपने मालिक के नाम पर, अर्थात् मोहम्मद गोरी के नाम पर ‘मोहम्मदपूर’ ऐसा किया था, जो अभी भी प्रचलित है ।
२. दिल्ली के पुरातत्व विभाग के पूर्व संचालक डॉ. धर्मवीर शर्मा के मतानुसार, ’दिल्ली में लगभग ३६५ गांवों के नाम विदेशी आक्रांताओं के नाम पर हैं ।’ इस्लामी आक्रांताओं द्वारा रखा महरौली का नाम पहले ‘मिहिरावाली’ था । प्रसिद्ध खगोल शास्त्री आचार्य मिहिर के नाम पर यह नाम रखा गया था ।
३. पौराणिक इतिहासकार नीरा मिश्र के मतानुसार, मुगलों के समय में दिल्ली के अनेक गांवों के नाम बदले गए । हौज खास और सिरी फोर्ट इस क्षेत्र का नाम शाहपुर जट था । मनीष कुमार गुप्ता के मतानुसार, मुगल काल में पटपडगंज का नाम साहिबगंज रखा गया । यह नाम मुगल बादशाह की एक प्रेमिका के नाम पर आधारित था ।
४. दक्षिण दिल्ली हुमायूंपुर, यह गांव ३५० वर्ष पहले का है । उसे पहले हनुमानपूर के नाम से पहचाना जाता था । आक्रांता उनके विजय की निशानी के रुप में गांव, विभाग और शहरों के नाम बदलते थे, ऐसा भी इतिहासकारों का कहना है ।
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