|
|

नई देहली – अमेरिकी दैनिक ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने संवाददाता के लिए एक विज्ञापन प्रकाशित किया है, जिसमें ‘भारत विरोधी एवं मोदी विरोधी’ विचारधारा होना यह पात्रता का मानदंड रखा गया है । यह विज्ञापन १ जुलाई को प्रकाशित किया गया है । यह विज्ञापन दक्षिण एशियाई उद्योग से संबंधित समाचार संकलित करने के पद के लिए है तथा इसमें उल्लेख किया गया है कि काम देहली से करना होगा ।
Hating PM Modi a pre-requisite at New York Times? Bizarre job description triggers rowhttps://t.co/6FDVuafIxD
— Republic (@republic) July 2, 2021
इस विज्ञापन में लिखे सूत्र
१. वह भारत सरकार के विरुद्ध लिखनेवाला एवं सत्ता परिवर्तन में सहायता करनेवाला होना चाहिए ।
२. इस में यह निवेदन किया गया है कि, भारत जनसंख्या की तुलना में चीन को टक्कर दे रहा है तथा जागतिक स्तर पर वह बडा बनने की महत्वाकांक्षा रखता है ।
३. इसमें दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत द्वारा चीन का विरोध एक नाटक है । यह नाटक सीमा पर एवं दोनों देशों की राजधानियों में चल रहा है ।
चीन द्वारा अमेरिकी दैनिकों को दिए जाते हैं करोडों रुपए के विज्ञापन !
विगत ४ वर्षों में चीन ने अमेरिकी दैनिकों को भारतीय मुद्रा के अनुसार १४२ करोड रुपए के विज्ञापन दिए हैं ।इसमें ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ को ४४ करोड ७३ लाख रुपए, ‘ वाशिंग्टन पोस्ट’ को ३४ करोड २९ लाख रुपए एवं ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ को ३ करोड ७२ लाख रुपए का भुगतान किया गया है । इसके अतिरिक्त, अन्य भी अनेक दैनिक समाचार पत्रों को चीन द्वारा विज्ञापन दिए जा रहे हैं । (इसीलिए ये दैनिक समाचार पत्र चीन को बिके हुए हैं तथा भारत विरोधी लेखन कर रहे हैं । इससे ध्यान में आता है कि अमेरिकी दैनिक पीत पत्रकारिता कर रहे हैं ! ऐसे दैनिकों को भारत में प्रतिबंधित किया जाना चाहिए ! – संपादक)
अब शत्रु की मिसाइलें हवा में ही नष्ट होंगी !
बांग्लादेश में कट्टरपंथियों के दबाव में आकर ‘सनातन धर्म संकुल’ का निर्माण कार्य रुका !
India Nuclear Weapon : भारत के पास अनुमान से बहुत अधिक परमाणु हथियार हो सकते हैं – पाकिस्तान
ATM Cash Crisis : ए.टी.एम. में नकदी आपूर्ति की समस्या पर केंद्र सरकार ने लिया गंभीर संज्ञान , बैंकों से रिपोर्ट मांगी ।
भारत के शस्त्रों द्वारा यूरोप पर कभी भी आक्रमण नहीं हुआ; परंतु यूरोप ऐसे देशों को शस्त्र बेचता है, जिनके द्वारा भारत पर आक्रमण होते हैं ! : External Affairs Minister Jaishankar
सामाजिक माध्यमों का उपयोग न्यायाधीशों की छवि खराब (बदनाम) करने के लिए नहीं किया जा सकेगा – Delhi High Court