चीन बार-बार शरारत कर रहा है, इसलिये उसके विरुद्ध आक्रामक नीति अपनाकर, उसे योग्य पाठ पढाने की आवश्यकता है !
बीजिंग (चीन) – लद्दाख के उपरांत, चीन ने अब उत्तर पूर्वी भारतीय सीमा के समीप अपनी गतिविधियां आरंभ की है । चीन ने अरुणाचल प्रदेश की सीमा तक पहुंचने के लिए एक महामार्ग बनाया है । यह महामार्ग तिब्बत के दक्षिण पूर्वी क्षेत्र को जोडा जाएगा । इस महामार्ग पर २ किमी लंबा सुरंग भी है । यह महामार्ग चीन की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है । यह महामार्ग चीन को तिब्बत के अन्य शहरों से जोडेगा । यह महामार्ग भारत की सुरक्षा के लिए संकट बन सकता है ।
यह महामार्ग दुनिया की सबसे गहरी घाटी, जांगबो ग्रांड से आरंभ होकर बायबैंग काउंटी में समाप्त होता है । यह क्षेत्र अरुणाचल प्रदेश के बिशिंग गांव की सीमा के समीप है । बिशिंग गांव अरुणाचल प्रदेश के गेलिंग सर्कल क्षेत्र में आता है । यह क्षेत्र मैकमोहन सीमा रेखा के समीप है । मैकमोहन रेखा, भारत तथा चीन के बीच की सीमा रेखा है । परंतु चीन को यह रेखा स्वीकार्य नहीं है । चीन भारत के अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता है । चीन बार-बार दावा करता रहा है कि अरुणाचल प्रदेश दक्षिणी तिब्बत का अंश है ।
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