नई दिल्ली: प्रसिद्ध पत्रकार और सूत्र संचालक रोहित सरदाना का हार्ड फेल होने से मेट्रो अस्पताल में निधन हो गया । वे ४२ वर्ष के थे । उन्हे कोरोना हो गया था, लेकिन बाद में उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी । इसके बाद २९ अप्रेल की रात सांस लेने में परेशानी होने से उन्हें अस्पताल में भरती किया गया था । ३० अप्रेल की दोपहर को उनका निधन हो गया । वे ‘आज तक’ इस हिंदी चैनल में कार्यरत थे । वे ‘दंगल’ कार्यक्रम का सूत्रसंचालन करते थे । वर्ष २०१९ में उन्हे गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार से सम्मानित किया गया । वे पहले ‘जी न्यूज’ नामक चैनल में कार्यरत थे । वहां ‘ताल ठोंक के’ इस कार्यक्रम का सूत्रसंचालन करते थे । राष्ट्र और हिंदुत्व के विषय को वे गंभीरता से प्रस्तुत करते थे । कुछ वर्षों में ही उन्होने सूत्रसंचालक के तौर पर प्रसिद्धि पाई थी । उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर शोक व्यक्त किया है ।
रोहित सरदाना के निधन से धर्मांधों को आनंद !
धर्मांधों की विकृत मानसिकता ! इस विषय में आधुनिकतावादी और धमेनिरपेक्षतावादी मुंह नही खोलेंगे, यह ध्यान दें !
रोहित सरदाना के निधन के बाद सोशल मीडिया पर कुछ धर्मांधों ने आनंद व्यक्त करने वाले ट्वीट किए हैं ।
१. ‘अली मौला’ नाम के इस ट्विटर हैंडल ने लिखा है कि, गंदे लोगों की इस विश्व को आवश्यकता नहीं, यह एक अच्छा समाचार है ।
२. इरफान बसीर वानी ने फेसबुक पर लिखा है कि, सरदाना मुसलमानों के विषय में द्वेष फैलाते थे, पिछले वर्ष तबलीगी जमात के विरोध में वे भौंक रहे थे । कोरोना फैलाने वाले बंगाल के चुनाव और हरिद्वार कुंभ की आवश्यकता नहीं थी । इसीलिए अल्लाह ने योजना बनाकर सरदाना को नरक जाने के लिए चुना ।
३. ‘अक्स’ नाम के ट्विटर हैंडल ने लिखा है कि, मुसलमानों को पाकिस्तान भेजते भेजते स्वयं नरक में गए ।
इसी प्रकार के अनेक ट्वीट्स धर्मांधों की ओर से किए गए हैं ।
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