तथाकथित पर्यावरणवादी ग्रेटा थनबर्ग का घडियाली आंसू बहाते हुए आह्वान !
यदि ग्रेटा थनबर्ग को भारत के प्रति इतना ही अपनापन लगता है, तो उन्हें भारत में राष्ट्र-विरोधी शक्तियां कर रहे किसान आंदोलन को दिया हुआ अपना समर्थन वापस लेना चाहिए तथा भारतीयों से क्षमायाचना करनी चाहिए ! भारतीय जानते हैं कि, इस प्रकरण में विश्व स्तर पर उसकी जो छवि मलिन हो गई है, उसे संवारने के लिए वह ऐसा आह्वान करने का नाटक कर रही है !

नई दिल्ली : ‘भारत वर्तमान में कोरोना महामारी की दूसरी लहर से गुजर रहा है । परिणामस्वरूप, देश को प्राणवायू, खाटें, वेंटिलेटर आदि की न्यूनता का सामना करना पड रहा है । इसलिए, विश्व को अग्रसर होकर कोरोना से संघर्ष कर रहे भारत की सहायता करनी चाहिए’, ऐसा एक खोखला ट्वीट स्वीडन के एक कथित पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने किया है । कुछ माह पूर्व, ग्रेटा थनबर्ग ने भारत में राष्ट्रविरोधी शक्तियों द्वारा चलाए जा रहे किसान आंदोलन के समर्थन में ट्वीट किया था । ऐसा करते हुए, उसने एक टूलकिट (आंदोलन करने के चरण ) साझा किया था । इससे, यह देखा गया था कि पूरे विश्व की भारत विरोधी शक्तियां तथाकथित किसान आंदोलन का समर्थन कर रही हैं । इसलिए उसकी आलोचना हुई थी ।
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(और इनकी सुनिए…) ‘ वर्तमान काल में वैकुंठगमन इत्यादि कहना मुझे स्वीकार्य नहीं है, यह विशिष्ट वर्ग द्वारा थोपी गई बातें हैं । ’- Sharad Pawar
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