१ लाख लोगों का धर्मांतरण व सैकडों चर्च बनाने का दावा !
कोरोना के संकट के समय मृतकों के सिर पर लगा मक्खन खाने का प्रयास कर रहे हैं ईसाई मिशनरी ! इन्हें रोकने के लिए केंद्र सरकार को त्वरित धर्मांतर विरोधी कानून बनाना चाहिए !

नई दिल्ली : कोरोना महामारी के दौरान भारत में जितने चर्च बनाए गए हैं, वो पिछले २५ वर्षों में नहीं बने । अब तक ईसाई मिशनरी ५० हजार गांवों में पहुंच चुके हैं । २५ प्रतिशत गांवों में गास्पेल (ईसा मसीह की सीख) फैलाने के प्रयास किए जा रहे हैं । इस अवधि में, एक लाख लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित किया गया है । अब वे ईसा मसीह पर विश्वास करते हैं और प्रार्थना करने के लिए चर्च जाते हैं । प्रत्येक चर्च १० गांवों में प्रार्थना आयोजित कर रहा है, ’अनफॉल्डिंग वर्ल्ड ’ के विशेष कार्यकारी अधिकारी डेविड रीव्स का ऐसा दावा किया है । ‘अनफोल्डिंग वर्ल्ड’, बाइबिल को स्थानीय भाषाओं में अनुवाद करने के लिए उपकरण प्रदान करता है ।
डेविड रीव्स ने कहा,
१. जैसे जैसे प्रतिबंध हटाए गए, मिशनरी सक्रिय हो गए ।
यह कार्य कठिन है ; क्योंकि कुछ मिशनरी मारे गए हैं । (रीव्स के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए क्योंकि वे गलत जानकारी देकर हिंदुओं को असहिष्णु बनाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि भारत में कहीं भी इस तरह की घटनाएं होने का समाचार नहीं है ! – संपादक) हालांकि, इस काम में बहुत कठिनाइयां हैं, किन्तु चर्च को काम करने से कोई नहीं रोक सकता है ।
२. कोरोना काल में लोग एक-दूसरे से नहीं मिल सकते थे, इसलिए दूरभाष और व्हाट्सएप के जरिए उनके पास प्रार्थनाएं पहुंचाई जाने लगी ।
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(और इनकी सुनिए…) ‘ वर्तमान काल में वैकुंठगमन इत्यादि कहना मुझे स्वीकार्य नहीं है, यह विशिष्ट वर्ग द्वारा थोपी गई बातें हैं । ’- Sharad Pawar
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