हिन्दुओं की धार्मिक गतिविधियों में, किसी भी पार्टी की सरकार के हस्तक्षेप किए बिना साधु, संत, महंत एवं शंकराचार्य को निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए । ऐसी स्थिति में उत्तराखंड में हिन्दुओं को भाजपा सरकार द्वारा इस प्रकार हस्तक्षेप करने की अपेक्षा नहीं है !

हरिद्वार (उत्तराखंड) – सरकार ने वर्ष २०२१ के कुंभ मेले के लिए राजयोग स्नानों की तिथियों की घोषणा की है । तदनुसार, महाशिवरात्रि के राजयोग स्नान को एक ‘सामान्य स्नान’ के रूप में घोषित किया गया है, जिससे संन्यासी अखाडों में आक्रोश व्यक्त किया जा रहा है । अखिल भारतीय अखाडा परिषद में ७ संन्यासी अखाडे हैं ।

१. निरंजनी अखाडा के महंत एवं अखिल भारतीय अखाडा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि सरकार ने इस प्रकरण में अखाडा परिषद तथा मेरे साथ विचार-विमर्श नहीं किया था । सरकार ने यह निर्णय उतावलेपन में लिया है ।
२. अखाडों का कहना है, ‘पूर्व में, अखाडा परिषद के साथ विचार विमर्श करने के उपरांत राजयोग स्नान की घोषणा की जाती थी । अखाडे के लिए महाशिवरात्रि एक महत्त्वपूर्ण पर्व है तथा वे इस दिन राजयोग स्नान की तैयारी करते हैं ।’
३. दूसरी ओर, मथुरा के वृंदावन में चल रहे यमुना कुंभ (संत समागम) में राजयोग स्नान में सहभाग लेने की अनुमति नहीं प्रदान की है । इसका अर्थ है कि ना तो हरिद्वार में कोई राजयोग स्नान होगा, ना ही वे वृंदावन जा पाएंगे । इससे अखाडों में अप्रसन्नता व्याप्त है ।
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