ऐसा न्यायालय को क्यों बताना पडता है ? केंद्र सरकार स्वयं ही ऐसा क्यों नहीं करती?

चेन्नई – मद्रास उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को यह सुझाव दिया है कि ‘देश में वंश, प्रदेश और भाषा के आधार पर समाज का विभाजन करने का षड्यंत्र रचनेवाली अलगाववादी शक्तियां युवकों कों भ्रमित न कर सकें; इसके लिए ऐसी शक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जाए, साथ ही उनमें यह भावना उत्पन्न न हो कि समाज में उनकी भाषा की उपेक्षा की जा रही है ; इसके लिए सतर्क रहें । इसमें न्यायालय ने यह भी कहा है कि ‘देश को बाहरी शत्रुओं की अपेक्षा देश के घटकों से ही अधिक धोखा है । आतंकवादी शक्तियों के विरुद्ध बेधडक होकर कार्यवाही करनी चाहिए ।’
प्रतिबंधित संगठन ‘तमिलनाडु लिबरेशन आर्मी’ के कार्यकर्ता आर. कलेलिंगम की जमानत नकारते हुए न्यायालय ने केंद्र शासन को उक्त सुझाव दिया । इस आरोपी पर वर्ष २०१४ में मदुराई और शिवगंगा जनपदों में, साथ ही पुद्दुचेरी के मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी के चारपहिया वाहन के नीचे बमविस्फोट करने का आरोप है ।
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