नक्सलियों का समर्थन करनेवाली, साथ ही राष्ट्रविघातक विचारधारा का उदात्तीकरण करनेवाली गौरी लंकेश की स्मृति में एकत्रित होनेवाले संगठन किस मानसिकता के होंगे, इसका विचार न करना ही अच्छा है !

बेंगलुरू : पूरे भारत के ४०० से अधिक महिला समूह तथा नागरी अधिकार संगठनों ने ५ सितंबर को गौरी लंकेश की स्मृति में लोगों के संवैधानिक अधिकारों पर हो रहा आक्रमण और अन्याय के विरुद्ध राष्ट्रीय अभियान का आयोजन किया है । गौरी लंकेश की हत्या की तीसरी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है । इस कार्यक्रम के परिप्रेक्ष्य में आयोजित पत्रकार परिषद में ‘हम आगे उठे नहीं तो..’ अभियान की घोषणा की गई । ‘इस अभियान के अंतर्गत प्रांगण में तथा ‘ऑनलाइन’ पद्धति से निषेध किया जाएगा’, ऐसा बताया गया ।
१. पत्रकार परिषद में मोदी सरकार की नागरिकता संशोधन अधिनियम, गिरती हुई अर्थव्यवस्था आदि नीतियों की आलोचना की गई । इसमें ऐसा भी कहा गया कि हिंसा भडकाने हेतु भडकाऊ भाषण देनेवाले नेताओं को गिरफ्तार करने की अपेक्षा एकता, शांति और संविधान के लिए काम करनेवाली महिलाएं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा रहा है ।
२. इस कार्यक्रम में विविध विषयोंपर आधारित वीडियो प्रसारित किए जाएंगे, सामाजिक प्रसारमाध्यमोंपर परिचर्चाओं का आयोजन किया जाएगा, ऑनलाइन प्रदर्शनी लगाई जाएगी और स्थानीय अधिकारियों को नागरिकों की ओर से देश की समस्याओं के संदर्भ में ज्ञापन प्रस्तुत किया जाएगा ।
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